रविवार, 13 जून 2010

जिन्दगी......... एक नदी

जिन्दगी एक नदी की तरह है जो बस चलती जाती है कभी तेज तो कभी आहिस्ता1 नदी की तरह जिन्दगी भी कभी रुकती नही, रुक जाते हैं तो बस इंसान शायद हमारी फितरत ही ऐसी है कि हमारे जज्बात किनारे की रेत की तरह पानी के बहाव मे नही बह जाते अपितू नदी के सीने मे उभरी शिला की तरह जड़ होते हैं, स्थिर होते हैं1 फिर जिन्दगी की रफ्तार से उत्पन्न कम्पन धीरे धीरे उसमे चेतना जगाती है और चेतन मन उस शिला पर बैठ कर बहाव को रोक लेना चाहता है पर नादान नही जानता की कल जब जिन्दगी क बहाव बढ़ जायेगा तो उसका अस्तित्व ही मिट जायेगा जिन्दगी उसे रौन्द कर बस चलती जायेगी नहीं देखेगी कि रास्ते पर जज्बात बिखरे जाते हैं बस कुछ निशान से दे जायेगी अपने होने का और जब बहाव कम होने पर वह उभरेगा तो बहुत कुछ होगा और जो हमने पाया होगा कुछ मलिन सा रौंदा हुआ जिंदगी के उस बहाव से जो अभी दूर किसी और शिला पर जाकर थोड़ा रुक कर आगे बह गया........


                                                                                                 सुमन 'मीत'

25 comments:

sajid ने कहा…

बेहतरीन शब्दों का प्रयोद्ग !
ये पोस्ट लम्बे समय तक याद रहेगी !
http://sajiduser.blogspot.com/

दीपक 'मशाल' ने कहा…

सुन्दर विचार.. कभी ओशो को पढ़िए.. और मज़ा आएगा..

sanjukranti ने कहा…

Good.....

दिलीप ने कहा…

bahut khoobsoorat vichaar....

M VERMA ने कहा…

'हमारे जज्बात किनारे की रेत की तरह पानी के बहाव मे नही बह जाते अपितू नदी के सीने मे उभरी शिला की तरह जड़ होते हैं, स्थिर होते हैं1'


बहाव को रोक लेने का जज्बा ही तो जिन्दगी है. और फिर बहाव जितना तेज हो जिन्दगी उतनी ही तो मुखर होती है.
सुन्दर आलेख. जिन्दगी को बयान करती

आचार्य जी ने कहा…

आईये जानें .... क्या हम मन के गुलाम हैं!

Suman ने कहा…

nice

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

बहुत सुंदर । जिंदगी चलने का नाम है ।

विजय शेंडगे ने कहा…

i like your thought

Shekhar Kumawat ने कहा…

शानदार पोस्ट है...

SELECTION & COLLECTION SELECTION & COLLECTION ने कहा…

शुक्रिया!!! सुन्दर,खुबसूरत विचार.. उपलब्ध कराने के लिए...

वाणी गीत ने कहा…

जिंदगी नदी की तरह ही है ..इसके बहाव में बह लिए ...तो पार हुए ...अटके तो बस मझधार में ही रहे ...
सुन्दर कव्यनुमा गद्य ...!!

anoop joshi ने कहा…

bhaut khub ma'm

अनामिका की सदाये...... ने कहा…

darshan ki baate hain lekin yatharth se ot-prot. shabd-sanyojan khoobsurat hai.

badhayi.

स्वाति ने कहा…

सुन्दर विचार..

shikha varshney ने कहा…

दर्शन और खूबसूरत शब्द बेहतरीन तालमेल.

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिवयक्ति। शुभकामनायें

संपादक हिमधारा ने कहा…

nice

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

suman,

tumhara katha lekha to bahut hi sundar hai aur maturity ki jhalak bhi liye hue hai .. meri badhayi sweekar karo ji

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

जीवन जैसे बहती नदिया,
सागर में मिल खोजाये ।
जैसे कोई परम आत्मा,
स्वयं ब्रह्म ही होजाये ॥

The guy sans voice ने कहा…

achcha hai !!!!!!! aise hi likhti rahen

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

ज़िंदगी के अनुभव ..एक विचार ..अच्छा लगा

अनुपमा त्रिपाठी... ने कहा…

एकदम अलग बिम्ब ..जज़्बात बहती नदी के बीच की शिला ....!!
एक अलग सोच दी आपने ...
बहुत सुंदर हृदयाभिव्यक्ति ...

सदा ने कहा…

वाह ...बहुत ही अच्‍छा लिखा है आपने ।

prerna argal ने कहा…

jindagi ke baare main sunder dhang se likha hai aapne.bahut achche vichaar.badhaai aapko.



please visit my blog.thanks.

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