बुधवार, 18 अगस्त 2010

"दिन कुछ ऐसे गुजारता है कोई " – गुलज़ार & जगजीत सिंह

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गुलज़ार जी एक बेमिसाल लेखक हैं और जब जगजीत सिंह जी उनके लफ्जों को सुर देते हैं तो वो एक दूसरे के पूरक बन जाते हैं .................


उनकी एलबम मरासिम से एक गज़ल..............


दिन कुछ ऐसे गुजारता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई.........


आईना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई...........


पक गया है शज़र पे फल शायद
फिर से पत्थर उछालता है कोई.............


देर से गूँजतें हैं सन्नाटे
जैसे हम को पुकारता है कोई ..............


दिन कुछ ऐसे गुजारता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई.........