शनिवार, 2 अक्तूबर 2010

ऐ खुदा रेत के सेहरा को समंदर कर दे............(शाहिद मीर & जगजीत सिंह)

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ऐ खुदा रेत के सेहरा को समंदर कर दे
या छलकती हुई आँखों को पत्थर कर दे
ऐ खुदा..........................................


तुझको देखा नहीं महसूस किया है मैनें
आ किसी दिन मेरे अहसास को तयकर कर दे
या छलकती हुई आँखों को पत्थर कर दे
ऐ खुदा..........................................

और कुछ भी मुझे दरकार नहीं है लेकिन
मेरी चादर मेरे पैरों के बराबर कर दे
या छलकती हुई आँखों को पत्थर कर दे
ऐ खुदा.........................................


                                                                               शाहिद मीर