सोमवार, 18 अक्तूबर 2010

सोचा नहीं अच्छा बुरा देखा......जगजीत&चित्रा

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सोचा नहीं अच्छा बुरा देखा सुना कुछ भी नहीं
माँगा खुदा से रात दिन तेरे सिवा कुछ भी नहीं
सोचा नहीं ...............................................................


देखा तुझे सोचा तुझे चाहा तुझे पूजा तुझे -2
मेरी ख़ता मेरी वफा तेरी ख़ता कुछ भी नहीं
माँगा खुदा से रात दिन तेरे सिवा कुछ भी नहीं
सोचा नहीं .............................................................


जिस पर हमारी आँख ने मोती बिछाए रात भर -2
भेजा वही कागज उसे हमने लिखा कुछ भी नहीं
माँगा खुदा से रात दिन तेरे सिवा कुछ भी नहीं
सोचा नहीं ..............................................................


इक शाम की दहलीज पर बैठे रहे वो देर तक -2
आँखों से की बातें बहुत मुँह से कहा कुछ भी नहीं
माँगा खुदा से रात दिन तेरे सिवा कुछ भी नहीं
सोचा नहीं ...............................................................


                                                                                              बशीर बद्र