रविवार, 26 जून 2011

तन्हाई.......













ये डूबा हुआ सूरज
दे आसमां को लाली
मिले पंछियों को बसेरा
मेरा दिल फिर भी खाली
                 फिर मिले आसमां को चन्दा
                 पौधों को रात की गहराई
                 नदी को चान्दनी की ठंडक
                 क्यों मिली हमें तन्हाई.......



                                सुमन 'मीत' 

34 comments:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

"..क्यों मिली हमें तन्हाई"
ज़वाब देना बहुत मुश्किल है.

सादर

वन्दना ने कहा…

इस क्यों का ही तो जवाब नही मिलता।

श्यामल सुमन ने कहा…

सुख मिलन से जितना भी मिलता जड़ में उतनी तन्हाई है.
गर सुमन कहे दिल खाली तो क्या जीवन से रुसवाई है?
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
http://meraayeena.blogspot.com/
http://maithilbhooshan.blogspot.com/

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

अनुत्तारित प्रश्न ...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

चलिए अच्छा ही हुआ!
तन्हाई में चिन्तन-मनन तो हो ही जाएगा!

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

आपका स्वागत है "नयी पुरानी हलचल" पर...यहाँ आपके पोस्ट की है हलचल...जानिये आपका कौन सा पुराना या नया पोस्ट कल होगा यहाँ...........
नयी-पुरानी हलचल

अमित श्रीवास्तव ने कहा…

सुन्दर , भावुक करती पंक्तियाँ..


दिल भर आया........

विशाल ने कहा…

bahut khoob ,suman ji.
tanhaaee to khudaa ki rahmat hai,kismat vaalon ko hee miltee hai.

RAJWANT RAJ ने कहा…

riktta ke ahsas ko bhut hi komlta se shbdbdh krne me aapke sfl pryas pr bhut si bdhai . aapko our bhi pdhna chahoongi .

वाणी गीत ने कहा…

क्यों मिली हमें तन्हाई ...
मासूम सी शिकायत ...
बेहतरीन !

संध्या आर्य ने कहा…

आह है जिंदगी
तू कैसे जी लेती है
तन्हाई में !! बढि‌‌‌या !!

ana ने कहा…

bahut khoob....suman ji.....abhar

Babli ने कहा…

सुन्दर, भावपूर्ण और शानदार रचना! उम्दा प्रस्तुती!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

Maheshwari kaneri ने कहा…

सुन्दर भाव मयी प्रस्तुति....

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति..

अनुपमा त्रिपाठी... ने कहा…

sunder ...shant se ehsaas ...!!

नीरज गोस्वामी ने कहा…

सुन्दर चित और भाव पूर्ण गीत...बधाई...

नीरज

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

गहन अभिव्यक्ति..... क्यों मिली हमें तन्हाई ..... बेहतरीन रचना

Sachin Malhotra ने कहा…

मिले पंछियों को बसेरा
मेरा दिल फिर भी खाली..एक अदभुत रचना !
मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - सम्पूर्ण प्रेम...(Complete Love)

रजनीश तिवारी ने कहा…

भावपूर्ण सुंदर कविता ...

mahendra srivastava ने कहा…

सच.. बहुत सुंदर रचना

mahendra srivastava ने कहा…

सच.. बहुत सुंदर रचना

vidhya ने कहा…

बहुत सुन्दर

रविकर ने कहा…

बहुत बहुत आभार ||
मिलता रहे आपका स्नेह||

Minakshi Pant ने कहा…

अपने सवालों का जवाब खोजती एक खूबसूरत रचना |

अल्पना वर्मा ने कहा…

bhaavpurn!

वन्दना महतो ! (Bandana Mahto) ने कहा…

oh ye bahut hi achcha laga.... ekdum se man ko chhu ke chala gaya. aur itni maasoomiyat se kiya gaya sawal ki mujhe kyun mili tanhayi..... sochne ko vivash karta hai

JHAROKHA ने कहा…

suman ji
bahut hi sundarta se apne bhavo ka chitran kiya hai.
bahut hiachhi lagi aapki ye bhav bhari post
.badhai
poonam

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 13/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

सदा ने कहा…

बहुत ही अच्‍छी शब्‍द रचना ।

prerna argal ने कहा…

बहुत ही गहनाभिब्यक्ति के साथ लिखी शानदार रचना बधाई आपको /




please visit my blog
www.prernaargal.blogspot.com

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

क्या बात है... बहुत सुन्दर...
सादर...

सागर ने कहा…

bhaut hi sundar....

sushma 'आहुति' ने कहा…

क्या बात है.... बहुत खूब....

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