शनिवार, 27 अगस्त 2011

अधूरी ख़्वाहिशें........

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सुनो !
आकर सहेज लेना
तुम
बरसने लगी हैं
आँखों से मेरे
वो हमारी
अधूरी ख़्वाहिशें........

                सुमन मीत


शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

तू ही तू .....

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तेरी रंगत यूँ बिखरी मेरी आँखों में है
तेरी सरगोशी मेरे उलझे रुखसारों में है
तेरा एहसास यूँ जज़्ब मेरे जर्रे जर्रे में है
तेरा नाम अब मेरे हाथों की लकीरों में है........

                              

                              सुमन मीत