शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

तू ही तू .....







तेरी रंगत यूँ बिखरी मेरी आँखों में है
तेरी सरगोशी मेरे उलझे रुखसारों में है
तेरा एहसास यूँ जज़्ब मेरे जर्रे जर्रे में है
तेरा नाम अब मेरे हाथों की लकीरों में है........

                              

                              सुमन मीत

38 comments:

๑♥!!अक्षय-मन!!♥๑, ने कहा…

bahut bahut bahut hi ehsason se bhara......pyar se bhare sare shabd rang se bhare sare ehsas,......aur khub acchi pic :)

ओम पुरोहित'कागद' ने कहा…

BAHUT KHOOB SUMAN !

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत ही सुंदर.....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत उम्दा मुक्तक लिखा है आपने!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

waah... bahut sundar bhaw

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

वाह!

POOJA... ने कहा…

short, solid but sweet...

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

बहुत खुबसूरत सुमन जी..क्या कहा है..साथ ही तस्वीर भी गजब की है....लाजवाब।

वन्दना ने कहा…

बहुत सुन्दर्।

सदा ने कहा…

बेहतरीन शब्‍दों का संगम ।

Kunwar Kusumesh ने कहा…

बहुत सुन्दर भावों से लबरेज़.
तस्वीर का जवाब नहीं .
मज़ा आ गया देखकर.

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

क्या बात है सुमन ... इतनी खूबसूरत पंक्तियाँ .. बहुत कुछ कहती हुई.. हाथो कि लकीरों में ...वाह वाह ,, काश इसे कुछ और लंबी लिखती .. तो मज़ा आ जाता ...

दिल से बधाई

आभार
विजय

कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html

Udan Tashtari ने कहा…

अति सुन्दर ...

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

wah ji kya baat hai...jabardast shabd chayan hai.

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

सुमन जी..क्या कहा है..साथ ही तस्वीर भी गजब की है.

Kajal Kumar ने कहा…

सुंदर.
अच्छा लगा जानकर कि हिमाचल से एक और ब्लागर है यहां :)

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

कविता और चित्र, दोनों लाजवाब।

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कम्‍प्‍यूटर से तेज़!
इस दर्द की दवा क्‍या है....

रचना दीक्षित ने कहा…

बहुत सुंदर मुक्तक पेश किया है सुमन जी, बधाई.

अमित श्रीवास्तव ने कहा…

आज नज़रों को खामोश रहने दो,लबों को भी तनिक बेहोश होने दो,
बस दिल से ही लिख दो दिल पे, इबारत "मोहब्बत" की ,
साँसों को बस आपस में यूँ ही घुलने दो ॥॥॥

Vivek Jain ने कहा…

बढ़िया

विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

.



सुमन 'मीत' जी
सस्नेह अभिवादन !

तेरा नाम अब मेरे हाथों की लकीरों में है…
अच्छा मुक्तक है …
बहुत सुंदर ! हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !


मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाओ के साथ…


-राजेन्द्र स्वर्णकार

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

सुभानाल्लाह ......
तुझे देखूं या तेरी तस्वीर देखूं .....

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 10/08/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूब

सागर ने कहा…

bhaut bhaut sundar pankti...

sushma 'आहुति' ने कहा…

बहुत ही खुबसूरत पंक्तिया...

सतीश सक्सेना ने कहा…

बढ़िया, शुभकामनायें आपको !

S.N SHUKLA ने कहा…

bahut khoobsoorat prastuti

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो
चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

सुनीता शानू ने कहा…

बहुत सुन्दर!!

Babli ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति के साथ भावपूर्ण कविता लिखा है आपने! शानदार प्रस्तुती!
आपको एवं आपके परिवार को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

दिगम्बर नासवा ने कहा…

खूबसूरत नज़्म .. कुछ ही लाइनों में गारी बात कही है ...
जब वो हाथों की रखाओं में है तो वो तो जीवन ही है ....

JHAROKHA ने कहा…

suman ji
aapki in chhotichhoti pnktiyon me chupi hui chahat ne dil ko chhu liya .padh kar yahi nikla --Wah
bahut hi prashnshniy sher bhait hi prbhav prerak
badhai
ponam

NEELKAMAL VAISHNAW ने कहा…

नमस्कार....
बहुत ही सुन्दर लेख है आपकी बधाई स्वीकार करें

मैं आपके ब्लाग का फालोवर हूँ क्या आपको नहीं लगता की आपको भी मेरे ब्लाग में आकर अपनी सदस्यता का समावेश करना चाहिए मुझे बहुत प्रसन्नता होगी जब आप मेरे ब्लाग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँगे तो आपकी आगमन की आशा में........

आपका ब्लागर मित्र
नीलकमल वैष्णव "अनिश"

इस लिंक के द्वारा आप मेरे ब्लाग तक पहुँच सकते हैं धन्यवाद्
वहा से मेरे अन्य ब्लाग लिखा है वह क्लिक करके दुसरे ब्लागों पर भी जा सकते है धन्यवाद्

MITRA-MADHUR: ज्ञान की कुंजी ......

शिखा कौशिक ने कहा…

very nice .awesome photo .

BLOG PAHELI NO.1

Rahul Paliwal ने कहा…

भाव तीव्रता कमाल की हैं.

Aditya Saklani ने कहा…

बहुत ही सुंदर शायरी, और कविताये भी पढ़ी आपकी बहुत ही उम्दा लिखते हो और ये पढकर बहुत हर्ष हुआ कि आप भी वही से हो जहा से हम है

संजय भास्कर ने कहा…

सुमन जी
...बहुत खूब

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