रविवार, 4 सितंबर 2011

तन्हा सफर
















तन्हा सफर में सब बेअसर होता है
ना कुछ पाने ना खोने का गम होता है
ये सोच कर साथी की चाह छोड़ दी हमने
कि बिछड़ जाने का दिल पर असर होता है.................!!

                                सुमन 'मीत' 

33 comments:

Hemant ने कहा…

U poured your heart with just 4 lines...amazing...

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

खूब.... सुंदर पंक्तियाँ हैं....

Saru Singhal ने कहा…

Wah, bahut sundar. Nice to meet you here, I am from Bilaspur (born in Nalagarh)...Hope to read more of your beautiful creations.

केवल राम : ने कहा…

सही कहा है आपने साथी के बिछड़ने का असर दिल पर ही नहीं बल्कि जीवन पर होता है ..लेकिन अगर कोई ऐसा साथी मिल जाये जो हमारी भावनाओं को समझे तो जीवन खुशहाल बन जाता है .....!

Kunwar Kusumesh ने कहा…

जब कोई साथ नहीं होता तब तन्हाई ही साथ देती है.

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन!!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत ही बढ़िया लिखा है आपने। ...और ऐसा अक्सर होता भी है ।

सादर

sushma 'आहुति' ने कहा…

bhaut khub...

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

सचमुच बिछडने का असर तो होता ही है। मन को छू जाने वाले भाव।

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नमक इश्‍क का हो या..
इसी बहाने बन गया- एक और मील का पत्‍थर।

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।

http://tetalaa.blogspot.com/

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

ye soch ke sathi ki chah chod di humne,ki bichar jane ka dil pe asar hota hai...laazwab:)

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 05/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

अजय कुमार ने कहा…

उम्दा है

सुधीर ने कहा…

बहुत गहरी बात। ...फिर भी चलते रहो तो कारवां बनता जाता है।

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

क्या बात है ....
बहुत खूब ....!!

ओम पुरोहित'कागद' ने कहा…

वाह सुमन !
अच्छ कीविता!
अभी जीवन बहुत पडा़ है
बहुत साथी मिलेंगे
एक से अच्छे एक------अनेक !
निराशा अच्छी नहीं !
जय हो !

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

क्या बात है...
सुन्दर भाव...
सादर...

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुर सुन्दर अभिव्‍यक्ति ।....कम शब्दों मे बहुत कुछ..

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सटीक कहा है ..सुन्दर ..

रचना दीक्षित ने कहा…

दिल के असर का तो क्या कीजे आजकल लोगों पर कम ही होने लगा है
सुन्दर प्रस्तुति

Rakesh Kumar ने कहा…

गजब की अभिव्यक्ति है आपकी.
पहली दफा आपके ब्लॉग पर आना हुआ है.
आपके 'अर्पित सुमन' का यह तन्हा सफर
दिल को छू गया है,सुमन जी.

सुन्दर प्रस्तुति केलिए आभार.

मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है.

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

sach kaha aapne dil par to asar hota hai aur bahut gehra hota hai. savdhan rahiyega.

Anil Avtaar ने कहा…

Very nice written in some words... Regards

Anil Avtaar ने कहा…

बहुत खूब ....!! सुन्दर प्रस्तुति, आभार.

JHAROKHA ने कहा…

suman ji
chand panktiyon me hi aapne sach ko bahut hi sarlta se abhivykat kiya hai.
bahut hi badhiya
poonam

shephali ने कहा…

bahut khub suman ji

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत खूब ... बिचाद जाने का दिल पे असर होता है ... सच है ..

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

सच ही तो कहा है सुमन जी .
हम सब अपने अपने सफर में तनहा ही तो है ..
बहुत अच्छी नज़म ..

बधाई !!
आभार
विजय
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कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html

Rahul Singh ने कहा…

दिल बेअसर फिर भी नहीं होता.

udaya veer singh ने कहा…

Matchless instance and narration with innocent
feelings . Thanks .

रविकर ने कहा…

साढ़े छह सौ कर रहे, चर्चा का अनुसरण |
सुप्तावस्था में पड़े, कुछ पाठक-उपकरण |

कुछ पाठक-उपकरण, आइये चर्चा पढ़िए |
खाली पड़ा स्थान, टिप्पणी अपनी करिए |

रविकर सच्चे दोस्त, काम आते हैं गाढे |
आऊँ हर हफ्ते, पड़े दिन साती-साढ़े ||

http://charchamanch.blogspot.com

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

आन्तरिक भावों के सहज प्रवाहमय सुन्दर रचना....

piyu... ने कहा…

bahut khub...

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