वजूद की तलाश.........अतीत की कलियां जब मुखर उठती हैं.......खिलता है ‘सुमन’ वर्तमान के आगोश में........कुछ पल......दम तोड़ देती हैं पंखुड़ियां.....भविष्य के गर्भ में ..........
कितना गहरा शब्द है यह ज़िंदगी जिस पर कितना लिखो कम ही रहता है इसलिए शाद आपने भी लिखा और मैंने भी ...:-) समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका सवागत हैhttp://aapki-pasand.blogspot.com/
23 comments:
bina kahe v sab kuch kahti hai aankhe...aur maun me v ek aisa sore jo bas pyaar ka hai..laazwaab rachna :)
ख़ामोशी की आवाज़ स्पष्ट सुनी जा रही है।
ख़ामोशी भी कभी कभी बहुत कह जाती है. बधाई इस सुंदर प्रस्तुति के लिये.
Sunder---kintu kuch halchal bhi rahe to achcha.
खूबसूरत त्रिवेणी
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"ज़िंदगी ख़ामोशी से तेरे साथ चल रही है…"
वाह सुमन जी !
बहुत ख़ूबसूरत त्रिवेणी लिखी है आपने !
चित्र के साथ सजा कर लिखना भी बहुत पसंद आया :)
शुभकामनाओं सहित …
हृदयस्पर्शी
बहुत सुन्दर रचना!
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गणतन्त्र दिवस की पूर्व वेला पर हार्दिक शुभकामनाएंँ!
बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
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गणतन्त्रदिवस की पूर्ववेला पर हार्दिक शुभकामनाएँ!
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आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
सूचनार्थ!
सुन्दर मगर कम से कम शब्दों में ..बहुत कुछ कह डाला!
यूँ ही खामोशी से उनका साथ मिलता रहे तो जिंदगी को और चाहिए भी क्या .... लाजवाब त्रिवेणी है ...
Badhia
आपकी ख़ामोशी बहुत अच्छी लगी ..
बेहतरीन भाव ... बहुत सुंदर रचना..........
वाह...वाह...वाह..लाजवाब प्रस्तुति
नीरज
कितना गहरा शब्द है यह ज़िंदगी जिस पर कितना लिखो कम ही रहता है इसलिए शाद आपने भी लिखा और मैंने भी ...:-) समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका सवागत हैhttp://aapki-pasand.blogspot.com/
बेहतरीन भाव .
लाजवाब प्रस्तुति.
Nice Blog , Plz Visit Me:- http://hindi4tech.blogspot.com ??? Follow If U Lke My BLog????
सुन्दर सोच की अभिव्यक्ति.....
कृपया इसे भी पढ़े-
नेता- कुत्ता और वेश्या (भाग-2)
बहुत सुन्दर...
सुन्दर ब्लॉग..
शुभकामनाएं..
भावपूर्ण !
सुन्दर,भावपूर्ण अभिव्यक्ति.
अल्प शब्दों में गहन भाव लिए.
प्रस्तुति के लिए आभार,सुमन जी.
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