शनिवार, 7 अप्रैल 2012

अनकहा
















.....तुम्हारे कहने 
मेरे सुनने के बीच 

जो था अनकहा 

कह दिया 
तुम्हारी ख़ामोशी ने 

कि अब लफ़्जों की जरुरत नहीं हमें ....


                                                     सु ..मन 

35 comments:

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

बहुत सुन्दर!...खामोशी ही कई बार बहुत कुछ कह जाती है!
नीचे दिए लिंक पर मेरे उपन्यास के बारे में अवश्य अपनी कीमती राय दें!
http://arunakapoor.blogspot.in/2012/04/blog-post_06.html

DEEPAK SHARMA KULUVI दीपक शर्मा कुल्लुवी ने कहा…

izhaar a muhabbat ke liye yah alfaaz bhi jyada hain

deepak kuluvi

alka ने कहा…

beautiful lines .....

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

Bahut khoob....!!

श्यामल सुमन ने कहा…

बहुत खूब सुमन

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूब ... सुंदर एहसास

परमजीत सिहँ बाली ने कहा…

बहुत खूब!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

क्या बात है !

वाह!

chandan bhati ने कहा…

bahoot sunder

रविकर फैजाबादी ने कहा…

सशक्त लेखन |
बधाई |

anju(anu) choudhary ने कहा…

एहसासों को शब्द नहीं दिए जा सकते

Udan Tashtari ने कहा…

वाह!! खामोशी की मासूम जुबां!!

संजय भास्कर ने कहा…

.......बहुत उम्दा रचना

नीरज गोस्वामी ने कहा…

Bahut Khoob

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

दो-तीन दिनों तक नेट से बाहर रहा! एक मित्र के घर जाकर मेल चेक किये और एक-दो पुरानी रचनाओं को पोस्ट कर दिया। लेकिन मंगलवार को फिर देहरादून जाना है। इसलिए अभी सभी के यहाँ जाकर कमेंट करना सम्भव नहीं होगा। आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!

मनोज कुमार ने कहा…

ये चुप्पी भी बहुत कुछ कह जाती है।

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर....

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

Waah...Bahut Sunder

dinesh aggarwal ने कहा…

क्या बात है...बहुत ही खूबसूरत...

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

nice.

dinesh gautam ने कहा…

बहुत सा अनकहा बयान करती सुंदर रचना। बधाई

रचना दीक्षित ने कहा…

बेहतरीन. बधाई इस प्रस्तुति के लिये.

expression ने कहा…

बहुत बहुत सुंदर!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

सदा ने कहा…

वाह ...बहुत खूब ।

Anupam karn ने कहा…

खूबसूरत प्रस्तुति!

vikram7 ने कहा…

kah diya khaamoshii ne.... bhaavo kii sundae abhivyakti

Sriram Roy ने कहा…

नमस्ते............बहुत खुबसूरत अभिवयक्ति.....

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत खूब ... क्या बात कह दी ....

veerubhai ने कहा…

मौन की अपनी भाषा होती है संवाद से ज्यादा मुखर .खामोशी बोलती है .हटाएं
बढ़िया प्रस्तुति हर माने में अव्वल .


सोमवार, 7 मई 2012
भारत में ऐसा क्यों होता है ?
http://veerubhai1947.blogspot.in/
तथा यहाँ भीं सर जी -
चोली जो लगातार बतलायेगी आपके दिल की सेहत का हाल

http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/
गोली को मार गोली पियो अनार का रोजाना जूस
http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/05/blog-post_07.html

सतीश सक्सेना ने कहा…

शब्दों की आवश्यकता ही कहाँ बची ...
शुभकामनायें आपको !

प्रताप नारायण सिंह (Pratap Narayan Singh) ने कहा…

कविता छोटी है किन्तु बाद बड़ी !
सुन्दर !

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

अति सुन्दर....आभार .

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

बहुत सुन्दर.

Reena Maurya ने कहा…

अति सुन्दर..
लाजवाब...
:-)

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