मंगलवार, 3 जुलाई 2012

आ भी जा .......











ये उनींदी आँखे
कर रही इंतजार तेरा
तू आये तो सो जाऊं मैं
तेरी बाहों में
एक सुखभरी नींद
कभी न जगने के लिए
है मालूम मुझको
जिंदगी न होगी
मेहरबान मुझ पर
दोबारा
मन’...!
मेरे इस सपने को
साकार कर दे
मुझे इस जिन्दगी की कैद से
मुक्त कर दे…….रिहा कर दे.......!!





सु-मन 

15 comments:

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत सुंदर रचना
क्या कहने

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूबसूरत रचना

अमित श्रीवास्तव ने कहा…

बेहद उम्दा

M VERMA ने कहा…

रिहाई मिली तो जाना कैद हो जाने का सुख

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बेहतरीन


सादर

शिवम् मिश्रा ने कहा…

बहुत खूब ...

आपके इस खूबसूरत पोस्ट का एक कतरा हमने सहेज लिया है एक आतंकवाद ऐसा भी - अनचाहे संदेशों का ... - ब्लॉग बुलेटिन के लिए, पाठक आपकी पोस्टों तक पहुंचें और आप उनकी पोस्टों तक, यही उद्देश्य है हमारा, उम्मीद है आपको निराशा नहीं होगी, टिप्पणी पर क्लिक करें और देखें … धन्यवाद !

निर्मला कपिला ने कहा…

लो जी आ गये इस उमदा रचना को पढने।

रचना दीक्षित ने कहा…

बहुत खूबसूरत रचना.

बधाई.

मनोज कुमार ने कहा…

कुछ क़ैद आज़ादी से बेहतर होती है। इस मुक्ति की कामना तो सभी की पूरी होनी ही है।

वाणी गीत ने कहा…

तेरे आने से आनी है भरपूर नींद तो तू आ ही जा....
वाह !

Aruna Kapoor ने कहा…

...इंतज़ार अब और नहीं!

दिनेश शर्मा ने कहा…

wah!wah!wah!

sushma 'आहुति' ने कहा…

भावों से नाजुक शब्‍द को बहुत ही सहजता से रचना में रच दिया आपने.........

सदा ने कहा…

भावमय करते शब्‍द ...

Reena Maurya ने कहा…

बहुत ही भावपूर्ण रचना...

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