मंगलवार, 3 जुलाई 2012

आ भी जा .......

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ये उनींदी आँखे
कर रही इंतजार तेरा
तू आये तो सो जाऊं मैं
तेरी बाहों में
एक सुखभरी नींद
कभी न जगने के लिए
है मालूम मुझको
जिंदगी न होगी
मेहरबान मुझ पर
दोबारा
मन’...!
मेरे इस सपने को
साकार कर दे
मुझे इस जिन्दगी की कैद से
मुक्त कर दे…….रिहा कर दे.......!!





सु-मन