मंगलवार, 15 जुलाई 2014

तेरी रज़ा



















ये जिंदगी मैंने लिख दी नाम तेरे 
तू रहबर बने या रकीब ये तेरी रज़ा !!


सु..मन 

24 comments:

Shweta Dave ने कहा…

bohut khoobsurat!

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बढ़िया ।

Prabhat Kumar ने कहा…

क्या बात...बहुत बढ़िया!

महेश कुशवंश ने कहा…

अच्छी पंक्तियाँ । कुछ और लिखे यानी कुछ ज्यादा लिखे ..... धन्यवाद

arpit goel ने कहा…

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अली सैयद ने कहा…

मेरे ख्याल से ज्यादा लिखने की बनिस्बत कम लिखना ज़्यादा दुश्वार होता है...और ये चुनौती आप अक्सर निबाह लेती हैं ! फिलहाल जो लिखा वो दीन-ओ-दुनिया दोनों के ही लिहाज़ से पढ़ा जा सकने वाला पैगाम है ! सम्पूर्ण समर्पण और भरोसे की नींव पर खड़ा और निहायत ही आसान सा दिखने वाला ये बयान दरअसल 'अनहद' और 'हद' दोनों को ही संबोधित कर बैठता है और फिर पाठक उसे 'एक और बार' पढ़ता है !

Onkar ने कहा…

सुंदर शेर

Vaanbhatt ने कहा…

बहुत खूब...

सु..मन(Suman Kapoor) ने कहा…

शुक्रिया श्वेता जी

सु..मन(Suman Kapoor) ने कहा…

शुक्रिया श्वेता जी

सु..मन(Suman Kapoor) ने कहा…

धन्यवाद :)

सु..मन(Suman Kapoor) ने कहा…

पसंद करने के लिए शुक्रिया

सु..मन(Suman Kapoor) ने कहा…

शुक्रिया महेश जी । इस ब्लॉग में शेर, मुक्तक और क्षणिकाएं हैं ।कविताओं के लिए आप मेरा दूसरा ब्लॉग पढ़ सकते हैं ।
www.sumanmeet.blogspot.com

सु..मन(Suman Kapoor) ने कहा…

Thnx fr appreciation Arpit ji

सु..मन(Suman Kapoor) ने कहा…

दिल से आभार आपका । यूँ ही हौसला अफजाई करते रहें और मार्गदर्शन भी ।लिखना तब सार्थक हो जाता है जब पाठक की रूह में उतर जाये ।

सु..मन(Suman Kapoor) ने कहा…

शुक्रिया

सु..मन(Suman Kapoor) ने कहा…

शुक्रिया

Prasanna Badan Chaturvedi ने कहा…

उम्दा और बेहतरीन ...आपको बहुत बहुत बधाई...
नयी पोस्ट@मुकेश के जन्मदिन पर.

कविता रावत ने कहा…

बहुत बढ़िया ..बहुत खूब!!

आशीष भाई ने कहा…

ख़ूबसूरत पंक्तियाँ , आ. सुमन जी धन्यवाद !
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आशीष भाई ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति , आप की ये रचना चर्चामंच के लिए चुनी गई है , सोमवार दिनांक - 28 . 7 . 2014 को आपकी रचना का लिंक चर्चामंच पर होगा , कृपया पधारें धन्यवाद !

हिमकर श्याम ने कहा…

बहुत खूब...

Yogi Saraswat ने कहा…

waah

vinars dawane ने कहा…

संग्रह योग्य

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