शुक्रवार, 1 अगस्त 2014

भीगा सावन














(ऑफिस जाते हुए सावन का नज़ारा )

भीगा भीगा सा है मौसम 
भीगी भीगी सी रुत बहार है 
भीगा भीगा सा है 'मन' मेरा 
भीगी भीगी सी सावन की फुहार है !!


सु-मन 

27 comments:

Yogi Saraswat ने कहा…

बढ़िया

सु..मन(Suman Kapoor) ने कहा…

शुक्रिया

राजीव कुमार झा ने कहा…

सुंदर.

Vaanbhatt ने कहा…

ऐसे में क्यों हम दीवाने हो जाएँ ना...

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

waah ..bahut sundar ....

सु..मन(Suman Kapoor) ने कहा…

धन्यवाद

सु..मन(Suman Kapoor) ने कहा…

:))))))

सु..मन(Suman Kapoor) ने कहा…

शुक्रिया निशा जी

आशीष भाई ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति , आ. धन्यवाद !
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आशीष भाई ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति , आप की ये रचना चर्चामंच के लिए चुनी गई है , सोमवार दिनांक - 4 . 8 . 2014 को आपकी रचना का लिंक चर्चामंच पर होगा , कृपया पधारें धन्यवाद !

BLOGPRAHARI ने कहा…

आपका ब्लॉग देखकर अच्छा लगा. अंतरजाल पर हिंदी समृधि के लिए किया जा रहा आपका प्रयास सराहनीय है. कृपया अपने ब्लॉग को “ब्लॉगप्रहरी:एग्रीगेटर व हिंदी सोशल नेटवर्क” से जोड़ कर अधिक से अधिक पाठकों तक पहुचाएं. ब्लॉगप्रहरी भारत का सबसे आधुनिक और सम्पूर्ण ब्लॉग मंच है. ब्लॉगप्रहरी ब्लॉग डायरेक्टरी, माइक्रो ब्लॉग, सोशल नेटवर्क, ब्लॉग रैंकिंग, एग्रीगेटर और ब्लॉग से आमदनी की सुविधाओं के साथ एक सम्पूर्ण मंच प्रदान करता है.
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संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में


फुर्सत मिले तो .शब्दों की मुस्कुराहट पर आकर नई पोस्ट जरूर पढ़े....धन्यवाद :)

Pratibha Verma ने कहा…

बेहतरीन...

Smita Singh ने कहा…

वाह

Satish Saxena ने कहा…

वाह !! मंगलकामनाएं आपको !

राहुल ने कहा…

तस्वीर सब कुछ बयां कर रही है....

Madhusudan Mahawar ने कहा…

Bahoot Khoob..

http://www.meapoet.in/

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत सुन्दर ....

Prasanna Badan Chaturvedi ने कहा…

बेहद उम्दा सामयिक रचना और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
नयी पोस्ट@जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ
रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनायें....

Onkar ने कहा…

सुंदर पंक्तियाँ

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

सुन्दर शब्दचित्र मन :भाव स्थिति

vibha rani Shrivastava ने कहा…

आपके पोस्ट के लिंक
https://www.facebook.com/groups/605497046235414/ .... यहाँ है .... आप भी आयें

Suman ने कहा…

हाय ! कितना खुशगंवार है आपके यहाँ का मौसम
हमारे यहाँ तो बिलकुल इसके विपरीत है :)
सुन्दर रचना !

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

वाह सावन का सुन्दर दृश्य दिखा दिया आपने बधाई।

Savita Mishra ने कहा…

बहुत सुन्दर ... दृश्य भी बहुत सुन्दर

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

मृत्यु और जीवन दो दरवाज़े हैं जीवात्मा एक दरवाज़े से निकल कर दूसरे में प्रवेश करता है। अंतकाल में व्यक्ति जो सोचता है उसी को प्राप्त होता है जो कृष्णभावना अमृत में रहता है वह वैकुण्ठ को जाता है उसके लिए यह अंतिम मृत्यु यानी परान्तकाल साबित होती है। सुन्दर पोस्ट।

प्रेम सरोवर ने कहा…

रचना मन के भावों को दोलायमान कर गई। मेरे नए पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है। शुभ रात्रि।

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