सोमवार, 24 नवंबर 2014

हसरतों की बारिश
















यूँ ही बरसती रहें हसरतों की बारिशें
यूँ ही किसी रोज़ फना हो जाऊं मैं
यूँ ही छलकते रहो मेरी आँखों से तुम
यूँ ही शब-ओ-रोज़ भीगती जाऊं मैं !!



सु-मन 

15 comments:

Yogi Saraswat ने कहा…

बहुत बढ़िया

Pallavi saxena ने कहा…

...वाह !!! यूं ही बरसती रहें हसरतों की बारिशें...:) यह हसरतें ही तो हैं जो इंसान को इंसान बनाए रखा करती है।

Kajal Kumar ने कहा…

वाह जी सुंदर

Reena Maurya ने कहा…

बहुत ही सुन्दर....

Digamber Naswa ने कहा…

बहुत खूब ... हसरतें हैं तो जीने की चाह हो ...

सदा ने कहा…

वाह .... क्‍या बात है

Madan Saxena ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर..

Upasna Siag ने कहा…

बहुत बढ़िया....

anklet ने कहा…

so nice

Vaanbhatt ने कहा…

बहुत खूब...

प्रभात ने कहा…

हृदयस्पर्शी पंक्तिया!

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

लाजबाब प्रस्तुति आभार सुमन जी ।

के. सी. मईड़ा ने कहा…

लाजवाब पंक्तियां

tejkumar suman ने कहा…

ati sundar rachana

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