शनिवार, 31 जनवरी 2015

जाम-ए-तन्हाई

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बाद – ए- अरसे लौटा है तेरा ख़याल
जाम –ए- तन्हाई की तलब होने को है !!



सु-मन 

बुधवार, 28 जनवरी 2015

गलती ख़्वाहिशें

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जाने किस नम कोने में 
दबी हैं ख़्वाहिशें 
गल रही हैं पर पनपती नहीं !!


सु-मन 

शनिवार, 17 जनवरी 2015

आरजूओं का अलाव

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पुर्ज़ा पुर्ज़ा कर दिए हैं एहसास 
सूखे रिश्ते की पपड़ियों को 
कर दिया है इक्कट्ठा 

देखो ! जलने लगा है 
आरजूओं का अलाव धुआँ धुआँ !!


सु-मन 

सोमवार, 5 जनवरी 2015

ईलाज-ए-मर्ज़

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ईलाज - ए - मर्ज़ भी होता है वक़्त रहते
ज़हर बन जाती है दवा एक मुद्दत के बाद !!

सु-मन