शनिवार, 5 दिसंबर 2015

रिश्ते की गर्माहट















.....कुछ ख़याल 
बुन रही हूँ मैं 
तुम्हारे एहसास के 
हर फंदे पर 
डाल रही हूँ 
एक बेजोड़ बुनाई 

सुनो ! 
इस दफ़ा जब 
दिसम्बर में आओगे न तुम 
रेशों से इन लफ्ज़ों को 
सिल देना अपने स्पर्श से  
मेरी नज़्म को ओढ़कर 
करना महसूस 
हमारे रिश्ते की गर्माहट !!


सु-मन 



13 comments:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बढ़िया !

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (06-12-2015) को "रही अधूरी कविता मेरी" (चर्चा अंक-2182) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत अहसास...लाज़वाब अभिव्यक्ति

Onkar ने कहा…

बहुत सुन्दर

Randhir Singh Suman ने कहा…

nice

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुंदर .
नई पोस्ट : तनहा सफ़र जिंदगी का

JEEWANTIPS ने कहा…

सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार..
मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका इंतजार....

Manoj Kumar ने कहा…

डायनामिक
बहुत सुंदर

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 07 दिसम्बर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

Rewa tibrewal ने कहा…

Waah

Rewa tibrewal ने कहा…

Waah

संध्या आर्य ने कहा…

भावपूर्ण !

Digamber Naswa ने कहा…

प्रेम के गहरे एहसास से सजा रूहानी ख्याल ...

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