शनिवार, 5 दिसंबर 2015

रिश्ते की गर्माहट

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.....कुछ ख़याल 
बुन रही हूँ मैं 
तुम्हारे एहसास के 
हर फंदे पर 
डाल रही हूँ 
एक बेजोड़ बुनाई 

सुनो ! 
इस दफ़ा जब 
दिसम्बर में आओगे न तुम 
रेशों से इन लफ्ज़ों को 
सिल देना अपने स्पर्श से  
मेरी नज़्म को ओढ़कर 
करना महसूस 
हमारे रिश्ते की गर्माहट !!


सु-मन