शनिवार, 19 मार्च 2016

ख़ामोशी

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जब कभी 
....मैं 
नहीं कह पाती 
....तुमसे 
अपने मन की बात 
मुठ्ठी भर ख़ामोशी 
भेज देती हूँ तुम्हें 
ख़ामोशी भी बोलती है 
सुन सको तो सुनना !!

सु-मन