सोमवार, 6 मार्च 2017

तुम और मैं -८

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.....तुम !
स्याह लफ्ज़ों में लिपटे ख़यालात हो
और मैं...
उन ख़यालों की ताबीर |

एक एहसास की नज़्म
आज भी ...
जिन्दा है तुम्हारे मेरे बीच !!

सु-मन 

शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

तुम और मैं - ७

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मेरी पेशानी पर 
तुम्हारे एहसास के दस्खत
आज भी 
तुम्हारे हक़ की हाज़री देते हैं ..

इश्क़ की जमाबंदी में तुम्हारे नाम की मुहर काबिज़ है !!

सु-मन 

मंगलवार, 24 जनवरी 2017

तुम और मैं -६

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तुम अनलिखी कविताओं का केंद्र बिंदु हो और मैं लिखी इबारतों से बची स्याही |

मेरे अशेष ! स्याह हो रीत लो मुझको ||

सु-मन