शनिवार, 17 जून 2017

बस यूँ ही ~ 2

8 comments

























मैं जिंदा तो हूँ , जिंदगी नहीं है मुझमें 
फक़त साँस चल रही है ज़िस्म फ़ना होने तक !!

सु-मन 

शनिवार, 3 जून 2017

बस यूँ ही ~ 1

5 comments



झील की चादर पर पड़ गई हैं सिलवटें 
आज फिर, मस्त पवन उससे मिलने आया है !!


सु-मन 

सोमवार, 6 मार्च 2017

तुम और मैं -८

11 comments


.....तुम !
स्याह लफ्ज़ों में लिपटे ख़यालात हो
और मैं...
उन ख़यालों की ताबीर |

एक एहसास की नज़्म
आज भी ...
जिन्दा है तुम्हारे मेरे बीच !!

सु-मन 

शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

तुम और मैं - ७

7 comments














मेरी पेशानी पर 
तुम्हारे एहसास के दस्खत
आज भी 
तुम्हारे हक़ की हाज़री देते हैं ..

इश्क़ की जमाबंदी में तुम्हारे नाम की मुहर काबिज़ है !!

सु-मन 

मंगलवार, 24 जनवरी 2017

तुम और मैं -६

8 comments

तुम अनलिखी कविताओं का केंद्र बिंदु हो और मैं लिखी इबारतों से बची स्याही |

मेरे अशेष ! स्याह हो रीत लो मुझको ||

सु-मन