शनिवार, 17 जून 2017

बस यूँ ही ~ 2

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मैं जिंदा तो हूँ , जिंदगी नहीं है मुझमें 
फक़त साँस चल रही है ज़िस्म फ़ना होने तक !!

सु-मन 

शनिवार, 3 जून 2017

बस यूँ ही ~ 1

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झील की चादर पर पड़ गई हैं सिलवटें 
आज फिर, मस्त पवन उससे मिलने आया है !!


सु-मन