मंगलवार, 12 जून 2018

शबनमी ख्वाब

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देर रात चाँद सोता रहा पलकों तले
चाँदनी तेरे ख्वाब को शबनमी करती रही !!



सु-मन 

शनिवार, 2 जून 2018

तेरा अश्क़ मेरा दामन

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गिरा तेरी आँख से इक क़तरा अश्क का
मेरा दामन यूँ सहरा से सागर बन गया ।।



सु-मन 

शुक्रवार, 25 मई 2018

ख़लिश

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एक ख़लिश सी पसरी है हर तरफ हरसू 
नुमाइश-ए-ज़ीस्त से इक धूल उतरती जाती है !!


सु-मन