सोमवार, 6 मार्च 2017

तुम और मैं -८

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.....तुम !
स्याह लफ्ज़ों में लिपटे ख़यालात हो
और मैं...
उन ख़यालों की ताबीर |

एक एहसास की नज़्म
आज भी ...
जिन्दा है तुम्हारे मेरे बीच !!

सु-मन 

शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

तुम और मैं - ७

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मेरी पेशानी पर 
तुम्हारे एहसास के दस्खत
आज भी 
तुम्हारे हक़ की हाज़री देते हैं ..

इश्क़ की जमाबंदी में तुम्हारे नाम की मुहर काबिज़ है !!

सु-मन 

मंगलवार, 24 जनवरी 2017

तुम और मैं -६

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तुम अनलिखी कविताओं का केंद्र बिंदु हो और मैं लिखी इबारतों से बची स्याही |

मेरे अशेष ! स्याह हो रीत लो मुझको ||

सु-मन 

शनिवार, 3 दिसंबर 2016

तुम और मैं -५

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जानती हूँ तुम नहीं हो ..

ख़ामोशी तुम तक पहुँचने का मेरा पसंदीदा एकमात्र विकल्प है !!

सु-मन 

शुक्रवार, 18 नवंबर 2016

तुम और मैं -४

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रिश्ते के प्रति प्रतिबद्धता मेरा निर्णय है और निष्कासन तुम्हारी अपनी चाह | सोच अलहदा होकर भी एक सी हैं ..बे-हद और बेलगाम |

हम लाईलाज तमन्नाओं से अभिशप्त हैं !!

सु-मन 

सोमवार, 7 नवंबर 2016

तुम और मैं -३

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        मेरे पास हज़ारों ख़्वाहिशें हैं तुम तक पहुँचने की और और तुम्हारे पास बहुत सारे गिले जुदा           होने के |

        चलो हिसाब बराबर हुआ ..गिला ख़्वाहिशों की नमी तले आबाद रहे !!

        सु-मन 

शनिवार, 29 अक्तूबर 2016

हौसले की लौ

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एक दिया रौशन कर देता है जिन्दगी 
हौसले की लौ को जब जलाता है वो !!

सु-मन 

दीप पर्व मुबारक !!