मंगलवार, 12 जून 2018

शबनमी ख्वाब

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देर रात चाँद सोता रहा पलकों तले
चाँदनी तेरे ख्वाब को शबनमी करती रही !!



सु-मन 

शनिवार, 2 जून 2018

तेरा अश्क़ मेरा दामन

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गिरा तेरी आँख से इक क़तरा अश्क का
मेरा दामन यूँ सहरा से सागर बन गया ।।



सु-मन 

शुक्रवार, 25 मई 2018

ख़लिश

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एक ख़लिश सी पसरी है हर तरफ हरसू 
नुमाइश-ए-ज़ीस्त से इक धूल उतरती जाती है !!


सु-मन 

सोमवार, 20 नवंबर 2017

तुम और मैं -९

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मैंने दीया जला कर 
कर दी है रोशनी ...
तुम प्रदीप्त बन 
हर लो, मेरा सारा अविश्वास |

मेरे आराध्य !
आस के दीये में 
बची रहे नमी सुबह तलक !!


सु-मन 

सोमवार, 9 अक्तूबर 2017

हुनर

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समेट लेना खुद को , अपने दायरे में 
सिखा देता है ये हुनर , वक़्त आहिस्ता आहिस्ता !!


सु-मन 

बुधवार, 30 अगस्त 2017

रूबरू

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तुझसे रूबरू न हो पाऊँ , न सही 
तेरी धड़कन अब मुझसे होकर गुजरती है !!

सु-मन 

शुक्रवार, 18 अगस्त 2017

शापित मंजिलें

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... स्थितियाँ 
बदल देती हैं 
राह जिंदगी की ...

... मंजिलें
अक्सर अकेली रह 
शापित हो जाया करती हैं !!


सु-मन