शनिवार, 27 अगस्त 2011

अधूरी ख़्वाहिशें........












सुनो !
आकर सहेज लेना
तुम
बरसने लगी हैं
आँखों से मेरे
वो हमारी
अधूरी ख़्वाहिशें !!

                सु-मन


26 comments:

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत खूब!!

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत ही सुंदर .....प्रभावित करती बेहतरीन पंक्तियाँ ....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत उम्दा शेर लिखा है आपने।

ओम पुरोहित'कागद' ने कहा…

वाह सुमन !
बहुत ही खूब !
जोरदार !
दमदार !
शानदार !
बधाई हो !
खूब लिखो-जम कर लिखो ! कल तुम्हारा है !

दर्शन कौर धनोय ने कहा…

बहुत सुंदर हैं आपकी ख्वाहिश सुमन ...आपके बाग़ में रोज आने को जी करता हैं ??????

दर्शन कौर धनोय ने कहा…

कभी मेरे सपनो में भी आओ .....इन्तजार रहेगा ??
http://armaanokidoli.blogspot.com/

Unknown ने कहा…

रेशमी ख्वाहिसे , रेशमी अहसास अनुरोध भी रेशमी

Yashwant Mathur ने कहा…

वाह!

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

आ'कर सहेज लेना तुम …




बरसने लगी है मेरी आंखों से …
अधूरी ख़्वाहिशें !


'मीत'सुमन जी
बहुत सुंदर ! जज़्बात और अल्फ़ाज़ मिल कर माहौल बना रहे हैं


♥ मंगलकामनाएं-शुभकामनाएं ♥
- राजेन्द्र स्वर्णकार

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

आ'कर सहेज लेना तुम …




बरसने लगी है मेरी आंखों से …
अधूरी ख़्वाहिशें !


'मीत'सुमन जी
बहुत सुंदर ! जज़्बात और अल्फ़ाज़ मिल कर माहौल बना रहे हैं


♥ मंगलकामनाएं-शुभकामनाएं ♥
- राजेन्द्र स्वर्णकार

vandan gupta ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।

http://tetalaa.blogspot.com/

Rajeysha ने कहा…

वाकई खास अर्थों वाली पंक्‍ि‍तयां....

sushma verma ने कहा…

बहुत ही सुन्दर....

Ankit pandey ने कहा…

वाह!बहुत खूब लिखा है आपने! मन की गहराई को बहुत ही सुन्दरता से प्रस्तुत किया है! आपकी लेखनी को सलाम.

दिगंबर नासवा ने कहा…

बहुत खूब ... किसी के हवाले कर के कितना मुक्त हो जाता है मन ... कुछ शब्दों में छिपे गहरे एहसास ...

मनोज कुमार ने कहा…

इन चन्द पंक्तियों में कुछ ऐसी बात है कि आंखें नम हो जाती हैं।

Vandana Ramasingh ने कहा…

बहुत बढ़िया

Kunwar Kusumesh ने कहा…

वाह.आँसू पर आपकी कविता पढ़कर किसी का एक बहुत प्यारा शेर याद आ गया.आप भी सुनिए:-
मज़ा बरसात का चाहो तो इन आँखों में आ जाओ,
वो बरसों में बरसती है,ये बरसों से बरसती है.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूबसूरती से कह दी है अपनी बात ...

Urmi ने कहा…

सुन्दर एहसास के साथ लाजवाब रचना लिखा है आपने! शानदार प्रस्तुती!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

सागर ने कहा…

sundar...

एक स्वतन्त्र नागरिक ने कहा…

चंद सहज सरल शब्दों में बहुत गहरी बात.
सचिन को भारत रत्न नहीं मिलना चाहिए. भावनाओ से परे तार्किक विश्लेषण हेतु पढ़ें और समर्थन दें- http://no-bharat-ratna-to-sachin.blogspot.com/

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

Behtreen....

संध्या आर्य ने कहा…

kya bat hai ..

shephali ने कहा…

jst b'ful

निर्झर'नीर ने कहा…

हौसला_अफज़ाई का आभार
..
चंद शब्दों में बहुत गहरी बात कही है आपने और लाजवाब अंदाज में

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