मंगलवार, 20 सितंबर 2011

वो लम्हें















वो बीते दिन
उन दिनों का
हर एक लम्हा
आज भी
नहीं होता जुदा
स्मृति पटल से
एक क्षण के लिये भी |

देखो ना !
इन पथरीली आँखों से
टपकने लगा है
उन लम्हों का सीलापन
वो लम्हें.....जो
महकते थे कभी
प्यार की खुशबू से !!


                         सु-मन 

46 comments:

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

shukriya Monika ji..

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति, बधाई

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

bahut bahut aabhar sunil ji..

परमजीत सिहँ बाली ने कहा…

सुंदर अभिव्यक्ति....

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Nice .

suman gaur ने कहा…

Ji bahut khubsurat likha hai aapne.........

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

मार्मिक चित्रण ..

Er. ने कहा…

Agar aap '.' aur '!' ke atyadhik prayog karna band karein, to aap ke dwara likhi huyi cheez sundar hone ke saath saath, sundar dikhayi bhi degi. :)

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

Arjit ji ..bahut achchha lga aapka sujhav dena ..maine ab hta diya hai...ab to achchi dikh rahi hai na...:))

Udan Tashtari ने कहा…

मार्मिक...

Dr. Zakir Ali Rajnish ने कहा…

कल्‍पना और भावनाओं का अद्भुत मिश्रण1

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मायावी मामा?
जीवन को प्रेममय बनाने की जरूरत..

Unknown ने कहा…

खूबसूरत और संवेदनशील चित्रण बधाई

रश्मि प्रभा... ने कहा…

bahut hi badhiyaa

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर शब्द संयोजन!

alka ने कहा…

beautiful lines.....

नीरज गोस्वामी ने कहा…

वाह...बेजोड़ रचना...

नीरज

vandan gupta ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।

http://tetalaa.blogspot.com/

Rajeysha ने कहा…

vakai! kafi nam bhavo ki abhivyakti...isliye aaj me jina jyada aasaan hai...

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

marmik rachna.

Pallavi saxena ने कहा…

बहुत सुंदर भावम्यी मार्मिक चित्रण को दर्शाती बढ़िया अभिवयक्ति
समय मिले तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
http://mhare-anubhav.blogspot.com/

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल 22 -09 - 2011 को यहाँ भी है

...नयी पुरानी हलचल में ...हर किसी के लिए ही दुआ मैं करूँ

amit kumar srivastava ने कहा…

लम्हा लम्हा करीब हुए,दूर भी हुए लम्हा लम्हा,
गवाह बन हर "वो लम्हा",रुला रहा हर "लम्हा !!!

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

यही लम्हे तो खजाना होते हैं.सुंदर रचना.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सिलेपन का टपकना ... भावपूर्ण अभिव्यक्ति

Yashwant Mathur ने कहा…

बहुत मर्मस्पर्शी।

सादर

सदा ने कहा…

भावमय करते शब्‍दों के साथ बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

prerna argal ने कहा…

प्रेम के एहसास में डूबी बहुत ही रूमानियत लिए सुकोमल एहसास से भरी संबेदंशील रचना /बहुत बधाई आपको /
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है /जरुर पधारें /

www.prernaargal.blogspot.com

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति....

रेखा ने कहा…

खुबसूरत अभिव्यक्ति ...

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

,,,, पथरीली आँखों से टपकने लगा है...
उन लम्हों का सिलापन ...

वाह! बहुत सुन्दर प्रस्तुति...
सादर...

रंजना ने कहा…

पीड़ा की सुन्दर कोमल अभिव्यक्ति..वाह....

Kunwar Kusumesh ने कहा…

अहा,क्या बात लिख दी आपने.

MUKESH MISHRA ने कहा…

इन पंक्तियों ने मुझे संवेदित किया है और मैंने महसूस किया कि स्मृति की यह विशेषता है कि वह अपने पीछे कोई पद-चिह्न नहीं छोड़ जाती - वह स्वयं पद-चिह्न बन जाती है | हम चलते पीछे की तरफ हैं, लेकिन पहुँचते वहाँ हैं जहाँ हम आज इस क्षण में हैं |

Jyoti Kaushal ने कहा…

very nice....

Unknown ने कहा…

बहुत गहरे जज्बात ...
" तुमसे बिछड़े हुए गुजर गया लम्हा ,
मगर लम्हे में मुलाकात की महक अब भी बाकि है ! "
शुभकामनाएँ !!

Amrita Tanmay ने कहा…

शक्ति-स्वरूपा माँ आपमें स्वयं अवस्थित हों .शुभकामनाएं.

Amrita Tanmay ने कहा…

शक्ति-स्वरूपा माँ आपमें स्वयं अवस्थित हों .शुभकामनाएं.

Amrita Tanmay ने कहा…

शक्ति-स्वरूपा माँ आपमें स्वयं अवस्थित हों .शुभकामनाएं.

Amrita Tanmay ने कहा…

शक्ति-स्वरूपा माँ आपमें स्वयं अवस्थित हों .शुभकामनाएं.

Amrita Tanmay ने कहा…

शक्ति-स्वरूपा माँ आपमें स्वयं अवस्थित हों .शुभकामनाएं.

amrendra "amar" ने कहा…

संवेदनशील प्रस्तुति ...

Unknown ने कहा…

वाह सुमन जी...दर्द कि नपी तुली और संतुलित अभिव्यक्ति.

Surendra shukla" Bhramar"5 ने कहा…

सुमन मीत जी प्रेम और विरह की --सुन्दर अभिव्यकित ..बहुत सुन्दर ब्लॉग आप का ..रचनाएं मन में घर कर जाती हैं
भ्रमर ५
भ्रमर का दर्द और दर्पण --में आप का स्वागत है -हो सके तो अपना सुझाव और समर्थन भी दें

Unknown ने कहा…

बहुत सुन्दर मीत (सुमन) जी.....कुछ तो है आपमें जो मुझे आपके ब्लॉग पे खीच ले आती है........

प्रियंका.... ने कहा…

बहुत खूब ....

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