शनिवार, 10 अगस्त 2013

तन्हाई









..............सबको 
कुछ देने के बाद 
जो शेष है तुम में 
दे दो वो मुझको 
अपनी ये तन्हाई !!


सु..मन 

16 comments:

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर...

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

वाह बहुत खूब

Albela Khtari ने कहा…

sundar aur sargarbhit kavya
badhaai

Saras ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Saras ने कहा…

बहुत सुन्दर सुमन
सब कुछ ख़ुदा से मांग लिया तुझको मांगकर
उठते नही हैं हाथ मेरे इस दुआ के बाद
अज्ञात

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

ओह, क्या बात
बहुत सुंदर

अरुन शर्मा 'अनन्त' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (11-08-2013) के चर्चा मंच 1334 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत सुंदर उम्दा पोस्ट ,,,

RECENT POST : जिन्दगी.

Vaanbhatt ने कहा…

तुम अपने दर्द-ओ-गम परेशानी मुझे दे दो...तन्हाई भी...

Ramakant Singh ने कहा…

सब कुछ देने के बाद शेष कुछ?
वैसे बेहतरीन एहसास

Er Himanshu Mishra ने कहा…

agar wo b de di to apne liye kya baki rahega,,,

आशा जोगळेकर ने कहा…

तनहाई ही तो अपनी है । सुंदर ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुंदर ।

रचना दीक्षित ने कहा…

तन्हाई को तोड़ने वाले तो अनेकों हैं.

Vinnie Pandit ने कहा…

Very well written.Vinnie

मदन मोहन सक्सेना ने कहा…

सुन्दर ,सरल और प्रभाबशाली रचना। बधाई। कभी यहाँ भी पधारें।
सादर मदन
http://saxenamadanmohan1969.blogspot.in/
http://saxenamadanmohan.blogspot.in/

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