रविवार, 18 दिसंबर 2011

तेरा साथ

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जिन्दगी
बिखर जायेगी
या सवँर जायेगी
ना मालूम मुझे
पर......
तेरे साथ ने
जिन्दगी के
मायने बदल दिये ......  !!
                               सु-मन 

सोमवार, 28 नवंबर 2011

आखिरी इबारत

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जिंदगी की किताब खोली
देखा !
कितने पन्नें पलट गए
कुछ भरे
कुछ खाली....

कुछ में बैठे हैं शब्द
मेहमां बनकर
और
कुछ में हैं जज्बात
बेजुबान से....

रह गए हैं अब तो
चंद ही पन्ने बाकी 

हूँ इतंजार में
कब लिखेगी मौत
मेरी जिंदगी की
      आखिरी इबारत...........  


सु-मन





रविवार, 6 नवंबर 2011

बेरंग जिंदगी

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क्यूँ जिंदगी हमसे आँख मिचोली करती है

      सुबह खुशी में खिलकर क्यूँ शाम गम में ढलती है

कहते हैं जिंदगी हर पल रंग बदलती है
      
      फिर क्यूँ हमें तस्वीर इसकी बेरंग सी झलकती है !!
                                                                    

                                       सु-मन  


मंगलवार, 20 सितंबर 2011

वो लम्हें

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वो बीते दिन
उन दिनों का
हर एक लम्हा
आज भी
नहीं होता जुदा
स्मृति पटल से
एक क्षण के लिये भी |

देखो ना !
इन पथरीली आँखों से
टपकने लगा है
उन लम्हों का सीलापन
वो लम्हें.....जो
महकते थे कभी
प्यार की खुशबू से !!


                         सु-मन 

रविवार, 4 सितंबर 2011

तन्हा सफर

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तन्हा सफर में सब बेअसर होता है
ना कुछ पाने ना खोने का गम होता है
ये सोच कर साथी की चाह छोड़ दी हमने
कि बिछड़ जाने का दिल पर असर होता है !!

                                सु-मन

शनिवार, 27 अगस्त 2011

अधूरी ख़्वाहिशें........

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सुनो !
आकर सहेज लेना
तुम
बरसने लगी हैं
आँखों से मेरे
वो हमारी
अधूरी ख़्वाहिशें !!

                सु-मन


शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

तू ही तू

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तेरी रंगत यूँ बिखरी मेरी आँखों में है
तेरी सरगोशी मेरे उलझे रुखसारों में है
तेरा एहसास यूँ जज़्ब मेरे जर्रे जर्रे में है
तेरा नाम अब मेरे हाथों की लकीरों में है !!

                              

                              सु-मन

रविवार, 26 जून 2011

तन्हाई

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ये डूबा हुआ सूरज
दे आसमां को लाली
मिले पंछियों को बसेरा
मेरा दिल फिर भी खाली
                 फिर मिले आसमां को चन्दा
                 पौधों को रात की गहराई
                 नदी को चान्दनी की ठंडक
                 क्यों मिली हमें तन्हाई !!



                                सु-मन

मंगलवार, 7 जून 2011

इक क़तरा जिन्दगी का....

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कह गई तुम्हारी खामोशी
तुम्हारे लब पे आई
हर बात
मेरे अश्क का क़तरा
मेरे लबों को सिल गया
और .....
वक्त लिख गया
खाली पन्नों पर
अपनी दास्तां !!
                             

सु-मन

बुधवार, 4 मई 2011

तेरा एहसास

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                मेरे चेहरे की रौनक बता देती है मुझे

                तेरा एहसास मेरी जिन्दगी बन गया है

                आईना शर्माता है अब मेरे अक्स से

                तेरा होना न जाने क्या जादू कर गया है !!





                                                                                                       सु-मन

रविवार, 3 अप्रैल 2011

जिन्दगी

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                                       हर रक में एक सिसकी

                                              हर लफ़्ज में एक आह

                                       क्या वो तू ही थी जिन्दगी

                                              जिससे मांगी थी मैनें पनाह !!

                                                          

                                                                                       सु-मन

मंगलवार, 22 मार्च 2011

दूसरा कौन

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एक बार राधा से श्रीकृष्ण से पूछा - हे कृष्ण ! तुम प्रेम तो मुझसे करते हों परंतु तुमने विवाह मुझसे नहीं किया , ऐसा क्यों ? मैं अच्छे से जानती हूं तुम साक्षात भगवान ही हो और तुम कुछ भी कर सकते हों , भाग्य का लिखा बदलने में तुम सक्षम हों , फिर भी तुमने रुकमणी से शादी की , मुझसे नहीं।
राधा की यह बात सुनकर श्रीकृष्ण ने उत्तर दिया - हे राधे ! विवाह दो लोगों के बीच होता है। विवाह के लिए दो अलग-अलग व्यक्तियों की आवश्यकता होती है। तुम मुझे यह बताओं राधा और कृष्ण में दूसरा कौन है। हम तो एक ही हैं। फिर हमें विवाह की क्या आवश्यकता है। नि:स्वार्थ प्रेम, विवाह के बंधन से अधिक महान और पवित्र होता है। इसीलिए राधाकृष्ण नि:स्वार्थ प्रेम की प्रतिमूर्ति हैं और सदैव पूजनीय हैं।



शनिवार, 26 फ़रवरी 2011

तुम हो

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मेरी हर साँस हर आस में तुम हो
क्या बताऊँ तुम्हें कि मेरी प्यास तुम हो
इन भीगी हुई पलकों की नमी तुम हो
मेरे वजूद में समाए बस तुम ही तुम हो !!


सु-मन

गुरुवार, 27 जनवरी 2011

तन्हा हम

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 रोज शाम यूं ही रात में बदलती है
        
          पर हर रात अलग होती है

 कभी आँखें खाबों से बन्द रहती हैं
        
          कभी तन्हा ही नम रहती हैं !!

सु-मन