रविवार, 3 अप्रैल 2011

जिन्दगी



                                       हर रक में एक सिसकी

                                              हर लफ़्ज में एक आह

                                       क्या वो तू ही थी जिन्दगी

                                              जिससे मांगी थी मैनें पनाह !!

                                                          

                                                                                       सु-मन

32 comments:

Udan Tashtari ने कहा…

वाह! बहुत खूब!

Anamikaghatak ने कहा…

kamaal ki lekhni.....utkrishta rachana

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर मुक्तक लिखा है आपने!

रचना दीक्षित ने कहा…

खूबसूरत पंक्तियों, गहरे भाव लिए हुए. बधाई.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूब ..

आशुतोष की कलम ने कहा…

मैं काव्यात्मक दृष्टी से नहीं कह रहा हूँ मगर व्यक्तिगत रूप से मुझे बहुत पसंद आई ये ४ पंक्तिया..
मगर शयद कुछ लोगो को निराशा का भाव लिए लग सकती है...
.................

आशुतोष की कलम से.
हिंदी कविता-कुछ अनकही कुछ विस्मृत स्मृतियाँ

TRIPURARI ने कहा…

सुमन जी...

ज़िंदगी के साथ एकाकार हो जाइए...

ज़िंदगी बहुत खूबसूरत है...

ओम पुरोहित'कागद' ने कहा…

बहुत ही खूब सुमन !
वाह ! क्या बात है ! गज़ब !
बहुत्य ही अच्छी पंक्तियां !
बधाई !
जय हो !

Shah Nawaz ने कहा…

वाह! बढ़िया शेअर

http://anusamvedna.blogspot.com ने कहा…

बहुत खूब ..........

Barmer news track ने कहा…

suman ji behtreen rachana ,kam alfajo mai sunder abhivyakti .

vandan gupta ने कहा…

हाँ वो ही थी
जो खुद पनाह
की मोहताज़ थी

दिल को छूती रचना।

विशाल ने कहा…

आपकी रचनाएँ हमेशा दिल को छूती हैं,
क्यों जो दिल से निकलती हैं.
यह रचना भी अपवाद नहीं.

मुआफी चाहूंगा,"बरक" शब्द का अर्थ स्पष्ट नहीं हो पाया.
हो सके तो बताईये.

Manpreet Kaur ने कहा…

बहुत ही अच्छे शबदो का उपयोग किया आपने !मेरे ब्लॉग पर आये ! हवे अ गुड डे !
Music Bol
Lyrics Mantra
Shayari Dil Se

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

आप सभी दोस्तों का बहुत बहुत शुक्रिया.....

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

विशाल जी...मेरी रचनाओं को पसन्द करने के लिये धन्यवाद..... बरक का अर्थ है... पन्ना, सफ़्हा (page)

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

वाह ...बहुत खूब ....!!

( बरक नहीं वरक होना चाहिए ..देख लें ...)

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

शुक्रिया हीर जी.....गलती बताने के लिये..... अब ठीक कर ली है ....शुक्रिया

Unknown ने कहा…

sundar panktiyaan
bahut achhi prastuti

निर्मला कपिला ने कहा…

सुन्दर भावमय अभिव्यक्ति। शुभकामनायें।

Kunwar Kusumesh ने कहा…

ग़ज़ब है ग़ज़ब.

सदा ने कहा…

वाह ... बहुत खूब कहा है आपने ।

शिवनाथ कुमार ने कहा…

सुन्दर, काफी अच्छी लगी !!

Vivek Jain ने कहा…

चार लाइनें पर बहुत ही सुंदर और गहरी, वाह
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

vijay kumar sappatti ने कहा…

suman ,,,, bahut sundar panktiyan , maine FB par bhi iski tareef ki thi ... kuch lambi kavitayen likho , jo aapki shaili hia , padhakar bahut accha lagta hai ..

badhayi

मेरी नयी कविता " परायो के घर " पर आप का स्वागत है .
http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/04/blog-post_24.html

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत खूब कहा है आपने|धन्यवाद|

shikha varshney ने कहा…

वाह बहुत खूब...क्या बात है.

Satish Saxena ने कहा…

बहुत खूब. शुभकामनायें !!

Unknown ने कहा…

वाह, जिंदगी की पनाह. शानदार लिखा.

दुनाली पर देखें
चलने की ख्वाहिश...

निर्झर'नीर ने कहा…

Aaj aapki bahut si rachnayen padhii ..ek se ek behtariin
lekin ye " chand panktiyon "man mein ghar sa kar gayii ..its really exceelent .
bandhaii swikar karen

वन्दना महतो ! (Bandana Mahto) ने कहा…

bahut khub!!!!!!!!!!!!!!!!

Richa P Madhwani ने कहा…

सुन्दर भाव
http://shayaridays.blogspot.com

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