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शनिवार, 2 जुलाई 2022

तन मिट्टी मन मिट्टी

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तन मिट्टी मन मिट्टी , ये जग भी मिट्टी होया 

तुझे सींचा खुद भीतर , जीवन मैल भी खोया 


सु-मन 

शुक्रवार, 7 अगस्त 2020

मन की रुबाई

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मन की रूबाइयों पर मत जा ऐ साकी 
जाम भर और रूह को रिंदाना कर दे !!

सु-मन 

शनिवार, 6 सितंबर 2014

शब्द से ख़ामोशी तक ..अनकहा ‘मन’ का

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एक नज़्म
अटकी है
अभी साँसों में
कुछ लफ्ज़
बह रहे
लहू में क़तरा क़तरा ...

एक दर्द   
ठहरा है
अभी ज़िस्म में
कुछ बरक
घुल रहे
रूह में रफ़्ता रफ़्ता ....!!
*****
(साँसों से चल कर ...रूह में ज़ज्ब हुआ कुछ ..क्या कुछ ...नहीं जाना | जाना तो बस इतना कि लफ्ज़ झरते रहे ...रूह भीगती रही ...दर्द घटता रहा ..नज़्म बढ़ती रही )

सु-मन 


शुक्रवार, 1 अगस्त 2014

भीगा सावन

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(ऑफिस जाते हुए सावन का नज़ारा )

भीगा भीगा सा है मौसम 
भीगी भीगी सी रुत बहार है 
भीगा भीगा सा है 'मन' मेरा 
भीगी भीगी सी सावन की फुहार है !!


सु-मन 

रविवार, 17 नवंबर 2013

इबादत का सिला

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मेरी इबादत का मिला ये सिला मुझको 

खुदा बन के 'मन' अब वो पत्थर हो गया ।।




सु-मन



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