शनिवार, 22 सितंबर 2018

उम्मीदें






धुँधली होने लगी हैं उम्मीदें 
तारीखें भूलने लगी हूँ मैं .. !!

सु-मन 

6 comments:

NITU THAKUR ने कहा…

वाह 👌👌👌 लेखन लाजवाब 👏👏👏

Renu ने कहा…

अच्छी पंक्तियाँ हैं| आभार |

RADHA TIWARI ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (24-09-2018) को "गजल हो गयी पास" (चर्चा अंक-3104) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
राधा तिवारी

संजय भास्‍कर ने कहा…

वाह!!!वाह!!! क्या कहने, बेहद उम्दा

Digamber Naswa ने कहा…

उम्मीद को साँसों की जरूरत है ... जिंदगी इसी का नाम है ...
बहुत खूब ...

Onkar ने कहा…

सुन्दर पंक्तियाँ

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