गुरुवार, 27 जनवरी 2011

तन्हा हम




 रोज शाम यूं ही रात में बदलती है
        
          पर हर रात अलग होती है

 कभी आँखें खाबों से बन्द रहती हैं
        
          कभी तन्हा ही नम रहती हैं !!



42 comments:

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

'मीत' सुमन जी
सादर अभिवादन !

छोटी छोटी काव्य रचनाओं का आपका अंदाज़ पसंद आया । बहुत ख़ूब !

गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !
- राजेन्द्र स्वर्णकार

UNBEATABLE ने कहा…

कम शब्दों में भावनाओं का सटीक प्रेषण ... बहुत खूब

deepak ने कहा…

Bahut hi Acha Likha hai , Aapki is Rachna ko pad kar ek sher yaad aa gaya ....... " Raaton ko Batakne ki Deta hai Sazaa Mujho , Mushkil Hai Pehlu Mein Dil Uske Bina Rakhna ....".

Asha Hai Behter se Behter Rachnayein Aap Se Sunne/Padne ko Milti Rahengi ......

boletobindas ने कहा…

छोटी रचना, सुंदर रचना.....सही में कभी कभी कुछ शब्द ही काफी कुछ याद दिला देते हैं

Sunil Kumar ने कहा…

chhoti magar asardar , badhai

ललित शर्मा ने कहा…


वाह जी, बहुत बढिया
भावों के लिए तो चार लाईने ही काफ़ी हैं
उम्दा लेखन के लिए आभार

घर घर में माटी का चूल्हा

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत खूब। शुभकामनायें।

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

choti si kavita me aapne to poora jeevan ka saar de diya hai

badhayi ho , tanhayi ki goonj hai in panktiyo me

vijay
pls read my new poem on poemsofvijay.blogspot.com

Mithilesh dubey ने कहा…

हममममममम, छोटी मगर लाजवाब अभिव्यक्ति से लवरेज रचना ।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

तनहा तो सारी दुनिया है दोस्‍त।

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जीवन के लिए युद्ध जरूरी?
आखिर क्‍यों बंद हुईं तस्‍लीम पर चित्र पहेलियाँ ?

राजेश चड्ढ़ा ने कहा…

अच्छी बात कही है आप ने....शुभकामनाएं

रश्मि प्रभा... ने कहा…

is nami me phir saikdon khwaab milte hain

Shekhar Kumawat ने कहा…

are wah

ana ने कहा…

lajwab

sanu shukla ने कहा…

sundar...!!

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

सही कहा है आपने...
और...
ज़िन्दगी का हर लम्हा कोई न कोई सबक भी देता है.

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार 29.01.2011 को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
आपका नया चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

Atul Shrivastava ने कहा…

इसे कहते हैं गागर में सागर। बधाई हो। कभी पधारिऐ हमारे भी ब्‍लाग में।
atulshrivastavaa.blogspot.com

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति ,इसको 2/3 मिसरों में और विस्त्रित किया जाये तो ये मुमताज सी लगेगी। बहरहाल बधाई।

Suman ने कहा…

bahut khubsurat....

Kunwar Kusumesh ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति.

रंजना ने कहा…

भावपूर्ण....

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत सुन्दर

Manav Mehta ने कहा…

tanha...............................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................

कुश्वंश ने कहा…

गहराइयो से कही बात का असर जल्दी होता है
इश्वर के घर भी,जज्बाती रचना..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ये तन्हाई पीछा नहीं छोडती ... क्या खूब लिखा है .....

अरविन्द जांगिड ने कहा…

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति| धन्यवाद|

आप को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ|

smshindi By Sonu ने कहा…

बहुत खूब

परमजीत सिँह बाली ने कहा…

सही कहा है आपने...

धीरेन्द्र सिंह ने कहा…

कम शब्दों में भावों की सरिता का अबाध प्रवाह है। लेखन की यह शैली बरबस ही अपनी ओर खींच लेती है।

वन्दना महतो ! ने कहा…

तस्वीर के साथ पंक्ति बहुत सुन्दर बन पड़ा है!

krishana ने कहा…

bahoot khooob....suprabhat

sagebob ने कहा…

आपके ब्लॉग पर पहली बार आया हूँ.बहुत ही बढ़िया पोस्ट पढने को मिली.
कम शब्दों में कमाल की अभिव्यक्ति.
आपकी कलम को सलाम.

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

सुमनजी,
बहुत सुन्दर ! तस्वीर और रचना दोनों सुन्दर है ...

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना।

बधाई।

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36garhsports ने कहा…

बहुत सुंदर मगर...
हर रात के बाद सवेरा आता है
तन्हा नम आंखों में
खुशियों की किरणें लाता है
तब सूख जातें हैं आंखों के अश्रु
और ख्वाब हकीकत में बदल जाता है

रचना दीक्षित ने कहा…

बहुत सुस्दर प्रस्तुति

amrendra "amar" ने कहा…

Bahut Khub .........sunder prastuti

Niranjana ने कहा…

Bahut sunder Suman !

Ajit Pal Singh Daia ने कहा…

bahut badhiya hai sumanji

neel pardeep ने कहा…

वाह कहूँ या आह ,सुमन जी?
कलम से लिखती हैं या लहू से?
सादर
प्रदीप नील www.neelsahib.blogspot.com

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