शनिवार, 18 मई 2013

रिहाई





















उसने दे दी अपनी हर साँस से रिहाई मुझको 
कुछ इस तरह उसने अपना हक अदा कर दिया !!


सु..मन 

25 comments:

Prakash Jain ने कहा…

bahut khoob

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

क्या बात

कविता रावत ने कहा…

मन की वेदना की गहरी अभिव्यक्ति ..

Ramakant Singh ने कहा…

गागर में सागर भरना कोई आपसे सीखे

RAHUL- DIL SE........ ने कहा…

वाह..कम शब्दों में सब कुछ .....

रश्मि शर्मा ने कहा…

वाह....बहुत खूब

दिगम्बर नासवा ने कहा…

वाह .. क्या अदा है हक अदा करने की ...
गहरी बात ...

अरुन शर्मा 'अनन्त' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (19-05-2013) के चर्चा मंच 1249 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

Udan Tashtari ने कहा…

ओह!

Ashok Khachar ने कहा…

are waaaah waaaaah kya bat hai bhot khub bhot khub

jyoti khare ने कहा…


प्रेम के अहसास की मानवीय अनुभूति
सुंदर रचना

Yashwant Mathur ने कहा…

बहुत ही बढ़िया



सादर

निहार रंजन ने कहा…

बहुत खूब.

expression ने कहा…

उनकी अदा और हमारी जान पर बन आयी....

अनु

shyam gupta ने कहा…

इस अदायगी की अदा का भी क्या कहिये ,
हर सांस सांस में मेरी, नूर तेरा घुल गया |

Shalini Rastogi ने कहा…

वाह सुमन जी!

***Punam*** ने कहा…

बहुत खूब....

Amit Srivastava ने कहा…

......और दो पंक्तियों में आपने दो साँसे उसे बक्श दी ।

sanny chauhan ने कहा…

बहुत खूब
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Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

वाह बहुत खूब


कभी किसी का हक यूँ ही अदा नहीं होता
बेवक्त कभी वक्त में नहीं तब्दील होता ||....अंजु

आशा बिष्ट ने कहा…

वाह

रचना दीक्षित ने कहा…

गज़ब का अहसास.

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

बढ़िया |

कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
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tejkumar suman ने कहा…

बहुत ही सुन्दर भाव लिये सटीक रचना।

manu jamwal ने कहा…

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