बुधवार, 11 मार्च 2015

आदतन















आदतन उसने झूठ से फिर बहलाया हमको
आदतन हम फरेब-ए-वफ़ा को सच मान बैठे !!

सु-मन 

9 comments:

Yogi Saraswat ने कहा…

स्वागत

Vishal Grover ने कहा…

वाह! कितनी खूबसूरती से मात्र दो पंक्तियों में आपने कितनी गहरी बात कह दी! बहुत खूब सुमन जी!

Dilbag Virk ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 12-03-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1915 में दिया जाएगा
धन्यवाद

Kailash Sharma ने कहा…

वाह..बहुत उम्दा

Madan Saxena ने कहा…


बहुत खूब,बहुत सुंदर

Digamber Naswa ने कहा…

इस आदत के गुलाम हैं या उनके कहने के ... जिसको सच मान लेते हैं जूठा होते हुए भी ...

Manoj Kumar ने कहा…

अच्छी रचना !
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है

Onkar ने कहा…

वाह

Rewa tibrewal ने कहा…

har bar....bar bar aisa hi hota hai .....sundar panktiyan

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