गुरुवार, 10 सितंबर 2015

बेवक़्त हादसे











मुक़र्रर है वक़्त हर चीज़ का लेकिन 
बेवक़्त हो जाया करते हैं हादसे जिंदगी में !!

सु-मन 

15 comments:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

हादसे बेवक्त नहीं होते है
हादसों का भी वक्त होता है
जिंदगी बेवक्त पूछने लगे
अगर वक्त क्या है तो क्या होता है :)

बहुत खूब ।

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, परमवीरों को समर्पित १० सितंबर - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत खूब !
नई पोस्ट : दिन कितने हैं बीत गए

रश्मि शर्मा ने कहा…

बि‍ल्‍कुल सही..

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

sach ....jo jindgi ka rukh badal dete hain ....

Udan Tashtari ने कहा…

सही कहा!!

रचना दीक्षित ने कहा…

हादसों की हक़ीकत दिल दहला देती है.

Kailash Sharma ने कहा…

बिलकुल सच...

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

बेवक्त और बेवजह भी ......
बेहतरीन

Digamber Naswa ने कहा…

तभी तो ये हादसे कहलाते हैं .. बेवक्त आ जाते हैं ...

Madhulika Patel ने कहा…

हादसों का कोई वक्त तय नहीं होता । बेहतरीन ।

Onkar ने कहा…

बहुत सुंदर

savan kumar ने कहा…

सुन्दर शब्द रचना..........
http://savanxxx.blogspot.in

Tejkumar Suman ने कहा…

सुन्दर रचना।

Tejkumar Suman ने कहा…

सुन्दर रचना।

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