सोमवार, 7 नवंबर 2016

तुम और मैं -३



        मेरे पास हज़ारों ख़्वाहिशें हैं तुम तक पहुँचने की और और तुम्हारे पास बहुत सारे गिले जुदा           होने के |

        चलो हिसाब बराबर हुआ ..गिला ख़्वाहिशों की नमी तले आबाद रहे !!

        सु-मन 

6 comments:

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

आज सलिल वर्मा जी ले कर आयें हैं ब्लॉग बुलेटिन की १५०० वीं पोस्ट ... तो पढ़ना न भूलें ...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है - १५०० वीं ब्लॉग-बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Suman ने कहा…

बहुत खूब कहा, कोई बंधकर खुश तो कोई मुक्त होकर !

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

हिसाब बराबर
कहाँ होता है
कुछ इधर कम
कुछ उधर
ज्यादा होता है :)

Digamber Naswa ने कहा…

बहुत ख़ूब ... हिसाब बराबर हो तो ज़िंदगी चलती रहती है

Onkar ने कहा…

सुन्दर पंक्तियाँ

Sudha Devrani ने कहा…

बहुत खूब

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