सोमवार, 6 मार्च 2017

तुम और मैं -८



.....तुम !
स्याह लफ्ज़ों में लिपटे ख़यालात हो
और मैं...
उन ख़यालों की ताबीर |

एक एहसास की नज़्म
आज भी ...
जिन्दा है तुम्हारे मेरे बीच !!

सु-मन 

11 comments:

Yogi Saraswat ने कहा…

बहुत बढ़िया

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

अच्छा है ।

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा आज मंगलवार (07-03-2017) को

"आई बसन्त-बहार" (चर्चा अंक-2602)

पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

Bahut Sundar post

Digamber Naswa ने कहा…

ये एहसास हाई डोर है ज़िंदगी की भी ... बहुत भावपूर्ण नज़्म ...

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर और भावपूर्ण...

shashi purwar ने कहा…

bahut sundar waah bhav purn abhivyakti

Onkar ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति

Digamber Naswa ने कहा…

ख़यालों की ताबीर हाई नज़्म बैन के उतरती है भावनाओं की ... गहरा ख़याल ...

Jyoti Dehliwal ने कहा…

एहसासो को व्यक्त करती बहुत बढिया प्रस्तुति।

Sanju ने कहा…

साथॆक प्रस्तुतिकरण......
मेरे ब्लाॅग की नयी पोस्ट पर आपके विचारों की प्रतीक्षा....

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