मंगलवार, 6 अक्टूबर 2015

तर्पण

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तर्पण की हर इक बूँद में समाया है पित्तरों का नेह 
अर्पण कर अंजुरी भर जल बरसता है यादों का मेह !!


सु-मन 

गुरुवार, 10 सितंबर 2015

बेवक़्त हादसे

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मुक़र्रर है वक़्त हर चीज़ का लेकिन 
बेवक़्त हो जाया करते हैं हादसे जिंदगी में !!

सु-मन 

सोमवार, 17 अगस्त 2015

भीगे लफ्ज़

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भीगते तो होंगे तुम्हारे भी कुछ लफ्ज़ 
मेरे याद के भरे बादल बरसते तो होंगे 
चलती तो होंगी तुम्हारे शहर भी हवाएँ
मेरे नाम के पत्ते शाख से गिरते तो होंगे !!

सु-मन 

गुरुवार, 30 जुलाई 2015

याद का घूँट

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बेसबब यूँ आया मोहब्बत का ख़याल
बेख़याली में तेरी याद का घूँट पी बैठे !!


सु-मन 

गुरुवार, 16 जुलाई 2015

हज़ में बरसता सावन

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बरस रहा है आज सावन 
हज़ के इस पाक महीने में 
सज गए हैं आज शिवालय 
इबादत हो रही मदीने में !!

सु-मन 

(चित्र : सुबह ऑफिस आते हुए बरसते सावन का नज़ारा )

गुरुवार, 2 जुलाई 2015

चाह मेरी

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चाह मेरी
हो जाऊँ इन बादलों सी 
स्याह मैं 
भर लूँ अपने भीतर 
खूब कालापन 
मुझमें समाहित हो 
तमाम रंग 
मेरे स्याह होने की गवाही दें 
लिखूँ मैं 
अपने भीतर की कालिख से 
एक प्रेमगीत !!

सु-मन 









गुरुवार, 18 जून 2015

हसरतों की बारिश

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भर भर 
खाली होता गया 
ख्वाहिशों का मयखाना 

बूँद बूँद 
अश्क होती गयी 
हसरतों की बारिश !!


सु-मन 
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