सोमवार, 28 नवंबर 2011

आखिरी इबारत




जिंदगी की किताब खोली
देखा !
कितने पन्नें पलट गए
कुछ भरे
कुछ खाली....

कुछ में बैठे हैं शब्द
मेहमां बनकर
और
कुछ में हैं जज्बात
बेजुबान से....

रह गए हैं अब तो
चंद ही पन्ने बाकी 

हूँ इतंजार में
कब लिखेगी मौत
मेरी जिंदगी की
      आखिरी इबारत...........  


सुमन 'मीत' 





37 comments:

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत गहरी अभिव्यक्ति..... उदासी के भाव क्यों...?

Udan Tashtari ने कहा…

क्या हुआ जो ये उदासी का आलम है?

भाव गहरे हैं!!

Deepak Shukla ने कहा…

Namaskaar ji..

Dard Dil main hain liye..
Koi chhupaaye aap hain..
Kavita main chhayi udasi...
Dikhti kyon chup-chap hain..

Jo bhi pal hain jindgi ke..
Wo to ham haskar jiyen..
Maut to aani hai ek din..
Phir kyon hum darkar jiyen..

Khush rahen hamesha..
Agli jindgi se bharpoor kavita ki pratiksha main...

Shubhkamnaon sahit...

Deepak Shukla..

Namaskaar ji..

Dard Dil main hain liye..
Koi chhupaaye aap hain..
Kavita main chhayi udasi...
Dikhti kyon chup-chap hain..

Jo bhi pal hain jindgi ke..
Wo to ham haskar jiyen..
Maut to aani hai ek din..
Phir kyon hum darkar jiyen..

Khush rahen hamesha..
Agli jindgi se bharpoor kavita ki pratiksha main...

Shubhkamnaon sahit...

Deepak Shukla..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!यदि किसी ब्लॉग की कोई पोस्ट चर्चा मे ली गई होती है तो ब्लॉगव्यवस्थापक का यह नैतिक कर्तव्य होता है कि वह उसकी सूचना सम्बन्धित ब्लॉग के स्वामी को दे दें!
अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!यदि किसी ब्लॉग की कोई पोस्ट चर्चा मे ली गई होती है तो ब्लॉगव्यवस्थापक का यह नैतिक कर्तव्य होता है कि वह उसकी सूचना सम्बन्धित ब्लॉग के स्वामी को दे दें!
अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

Sunil Kumar ने कहा…

इतनी मायूसी अच्छी नहीं .........

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

सार्थक रचना....
आपको जन्म दिन की सादर बधाई......
कविश्रेष्ठ बच्चन जी की पंक्तिया जाने क्यूँ झिलमिला रही हैं...
“जिन बातों पर अधिकार नहीं
उन बातों पर चर्चा कर के
अब तक जग ने क्या पाया है
जो कर चर्चा मैं पाउँगा...”

सादर...

अरूण साथी ने कहा…

woh....gahri sambedna.....par nirash ke bhaw kun....intjar kya karna....jab aani hai aa jaegiiii

ana ने कहा…

bahut hi bhavpoorna kavita....sadar

sushma 'आहुति' ने कहा…

हूँ इतंजार में
कब लिखेगी मौत
मेरी जिंदगी की
आखिरी इबारत...........बहुत ही संवेदनशील रचना.....

sachin garg ने कहा…

sach me bada hi gharha bhav hia ji

sachin garg ने कहा…

sach me bada hi gharha bhav hai ji ....

Anju ने कहा…

bahut hi khoobsurat ,bhaav alfaaz ....

Rajey Sha राजे_शा ने कहा…

Dar asal uska intzaar nahi kiya ja sakta, maut ko maza aata hai... achanak-pan me... aap uske baare me kuchh bhi rai rakho... wo utni hi ajnabi hoti hai..jitni hai..hum uski shakl badal saktay hain...roj u-say ji kar...

वन्दना ने कहा…

बेहतरीन भाव है मगर ऐसा ना कहे आज के दिन्………आप को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें्…………

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

अभी तो बहुत सी इबारतें लिखनी बाकी हैं।
आपको जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो।

सादर

ASHA BISHT ने कहा…

achchhe shabd...

अनुपमा पाठक ने कहा…

आखरी इबारत अमरता लिख जाती है... सुन्दरता से व्यतीत किये हुए जीवन पर!
CELEBRATE LIFE!!!
आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं:)

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

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* आदरणीया सुमन'मीत'जी*
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं !


हार्दिक बधाई !
- राजेन्द्र स्वर्णकार
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Deepak Shukla ने कहा…

Suman ji...

Janm divas le kar ke aaye..
Man main nav utsaah..
Sabhi swapn pure ho tere..
Hum sabki ye chaah..

Hardik shubhkamnayen sweekar karen..

Deepak Shukla..

सदा ने कहा…

वाह ...बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति

कल 30/11/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, थी - हूँ - रहूंगी ....

रश्मि प्रभा... ने कहा…

abhi is aakhiri ibaarat kee zarurat nahi... behtareen rachna

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

vrshon beet jate hain is kitab ko bharte bharte...aur aaj tak apna koi aakhri panna, aakhri ibarat nahi likh paya.

sunder abhivyakti.

अमित श्रीवास्तव ने कहा…

मेरी ज़िन्दगी ने तो मौत से दोस्ती कर ली,
अब मौत की खुशी की खातिर मौत ही सही !!

Madhaw Tiwari ने कहा…

शब्दों की ख़ूबसूरत रचना है, अभिव्यक्ति ही एक रास्ता है

मनोज कुमार ने कहा…

जो भी पन्ने हैं उस पर चिरस्मरणीय इबारत लिखी जानी चाहिए।

सागर ने कहा…

बहुत सुंदर भावों से बेहतरीन रचना....

चैतन्य शर्मा ने कहा…

Happy Birth Day To You....

मनीष सिंह निराला ने कहा…

chhoti par bhaaw se paripurn..!

धनपत स्वामी ने कहा…

बेहतरीन रचना...ऐसी रचनाये दिल से सबसे नाजुक हिस्से से ही निकल सकती है जहा दर्द का बसेरा हो.....

dheerendra ने कहा…

बहुत गहरे भाव दर्शाती उत्तम रचना,...
मेरे नए पोस्ट "प्रतिस्पर्धा"में आपका इंतजार है,...

Kunwar Kusumesh ने कहा…

चिंतनपरक लेखन.
आखिरी इबारत की बात ठीक नहीं .We have to be optimistic always.

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

मै पहली बार यहां आया हूं, वाकई बहुत सुंदर रचना है।
अब नियमित रहने की कोशिश होगी। बहुत बढिया...

प्रेम सरोवर ने कहा…

इस पोस्ट के लिए धन्यवाद । मरे नए पोस्ट :साहिर लुधियानवी" पर आपका इंतजार रहेगा ।

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

नहीं...नहीं...ऐसा मत कहो!

ZEAL ने कहा…

प्रिय सुमन जी , उन बचे हुए पन्नों को, बेज़बान जज्बातों को शब्द देकर भर दीजिये !

Reena Maurya ने कहा…

गहन भाव लिए
संवेदनशील रचना....

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