गुरुवार, 18 जून 2015

हसरतों की बारिश










भर भर 
खाली होता गया 
ख्वाहिशों का मयखाना 

बूँद बूँद 
अश्क होती गयी 
हसरतों की बारिश !!


सु-मन 

14 comments:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बढ़िया :)

रश्मि शर्मा ने कहा…

बहुत बढ़ि‍या

रचना दीक्षित ने कहा…

हसरतों की बारिश ही नहीं पूरी भी तो करनी हैं हसरतें

Digamber Naswa ने कहा…

ख्वाहिशें उतर जाती हैं अश्कों के साथ ...
बहुत खूब ...

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (19-06-2015) को "गुज़र रही है ज़िन्दगी तन्‌हा" {चर्चा - 2011} पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

बहुत सुन्दर ...

sadhana vaid ने कहा…

बहुत सुन्दर !

Kunwar Kusumesh ने कहा…

waaaaaaaaaaaaah

Kailash Sharma ने कहा…

ख्वाहिशों और अश्कों का बहुत गहरा नाता है...बहुत ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति...

Onkar ने कहा…

बहुत खूब

Ankur Jain ने कहा…

कम शब्दों में गहरे अर्थ संजोये सुंदर प्रस्तुति।

jyoti khare ने कहा…

वाह बहुत खूब --- सहज पर गहरी

Yogi Saraswat ने कहा…

बहुत सुन्दर !

हिमकर श्याम ने कहा…

वाह! बहुत ख़ूब !!

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