बुधवार, 28 जनवरी 2015

गलती ख़्वाहिशें











जाने किस नम कोने में 
दबी हैं ख़्वाहिशें 
गल रही हैं पर पनपती नहीं !!


सु-मन 

5 comments:

दिगंबर नासवा ने कहा…

क्या बात ... ख्वाहिशें जो पनप नहीं पातीं गल जाती हैं ...

Kailash Sharma ने कहा…

वाह..बहुत खूब

Yogi Saraswat ने कहा…

बहुत खूब

दिलबागसिंह विर्क ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 29-01-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1873 में दिया गया है
धन्यवाद

अजय कुमार झा ने कहा…

अहा , उम्दा जी उम्दा , भई बहुत अच्छे

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