शनिवार, 26 दिसंबर 2015

हर दफ़ा












हर दफ़ा भूल जाते हो तुम अपनी कही हर बात 
मैं सोच कर इसे पहली दफ़ा हर बार भूल जाती हूँ !!

सु-मन 

7 comments:

Onkar ने कहा…

बहुत सुन्दर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (27-12-2015) को "पल में तोला पल में माशा" (चर्चा अंक-2203) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

अजय कुमार झा ने कहा…

वाह जी बहुत अच्छे और बहुत गहरे

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुंदर .
नई पोस्ट : तुम्हारे ख़त

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत बढ़िया ...

Madhulika Patel ने कहा…

बहुत सुंदर ।

दिगंबर नासवा ने कहा…

वाह ... क्या बात है ... अच्छा उलट फेर ...

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