सोमवार, 8 अगस्त 2016

दर्द













मेरे दर्द की खबर भी नहीं हुई जमाने को 
दर्द मुझको और मैं दर्द को यूँ जीता रहा !!

 सु-मन 

12 comments:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

जमाना तो खुद डूबा हुआ है दर्द में कई जमाने हो गये
जमाने भर के दर्द हैं जमाते जमाते जमाना बीत जाता है ।
:)

बढ़िया दर्द है ।

Jyotirmoy Sarkar ने कहा…

Nice one.

Kavita Rawat ने कहा…

जा तन लागि सो जाने ....बहुत सुन्दर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (10-08-2016) को "तूफ़ान से कश्ती निकाल के" (चर्चा अंक-2430) पर भी होगी।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Kailash Sharma ने कहा…

वाह...बहुत उम्दा

रश्मि शर्मा ने कहा…

Waah

Alpana Verma ने कहा…

वाह! चित्र के लिए भी वाह! वाह!

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "भूली-बिसरी सी गलियाँ - 9 “ , मे आप के ब्लॉग को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Unknown ने कहा…

बहुत सुन्दर बात। सस्नेह

Unknown ने कहा…

बहुत सुन्दर बात। सस्नेह

Unknown ने कहा…

बहुत ही सच बात । सस्नेह

Unknown ने कहा…

बहुत ही सच बात । सस्नेह

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