वजूद की तलाश में .. अतीत की कलियां जब मुखर उठती हैं .. खिलता है ‘सुमन’ वर्तमान के आगोश में कुछ पल .. दम तोड़ देती हैं पंखुड़ियां .. भविष्य के गर्भ में .. !!
होता है कई बार ऐसे भी .......सही आंकलन किया ऐसी परिस्तिथियों का ..किन्तु मेरे विचार में उम्मीद की किरणों को आने दो ज़ेहन के रौशनदानों से फिर खिलेंगे फूल, महकेगी ज़िन्दगी खुशनुमा अरमानों से .. डॉ पूनम माटिया
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (20-06-2017) को "पिता जैसा कोई नहीं" (चर्चा अंक-2647) पर भी होगी। -- सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। -- चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है। जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये। हार्दिक शुभकामनाओं के साथ। सादर...! डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
9 comments:
Nice
वाह
बहुत सुंदर
सुन्दर।
होता है कई बार ऐसे भी .......सही आंकलन किया ऐसी परिस्तिथियों का
..किन्तु मेरे विचार में
उम्मीद की किरणों को आने दो ज़ेहन के रौशनदानों से
फिर खिलेंगे फूल, महकेगी ज़िन्दगी खुशनुमा अरमानों से .. डॉ पूनम माटिया
सुन्दर अभिव्यक्ति ,आभार। "एकलव्य"
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (20-06-2017) को
"पिता जैसा कोई नहीं" (चर्चा अंक-2647)
पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
वाह
मन के गहरे एहसास लिए पंक्तियाँ ...
बहुत खूब
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