मंगलवार, 8 सितंबर 2020

चाहत
















बहुत जी लिया - २ तुझको जीते जीते
तुझमें खो कर खुद को, अब पाने की चाहत है !!

सु-मन 

6 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (09-09-2020) को   "दास्तान ए लेखनी "   (चर्चा अंक-3819) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  
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सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सु न्दर

Madhulika Patel ने कहा…

बहुत बढ़िया,

मन की वीणा ने कहा…

वाह अद्भुत।

Onkar ने कहा…

सुंदर

Marmagya - know the inner self ने कहा…

आदरणीया सुमन कपूर जी, नमस्ते! बहुत सुंदर पंक्तियाँ हैं। एक मुकम्मल गजल की ख्वाहिश है। साधुवाद!
मैंने आपका ब्लॉग अपने रीडिंग लिस्ट में डाल दिया है। कृपया मेरे ब्लॉग "marmagyanet.blogspot.com" अवश्य विजिट करें और अपने बहुमूल्य विचारों से अवगत कराएं।
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सादर!--ब्रजेन्द्रनाथ

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