सोमवार, 28 दिसंबर 2020

सर्द हवाएँ

 










बहुत सर्द हैं हवाएँ

घना कोहरा बेहिज़ाब है

जर्द पत्तों में है ख़ामोशी

तेरी ख़लिश बेहिसाब है !!


सु-मन 

3 comments:

Onkar ने कहा…

बहुत सुन्दर

जितेन्द्र माथुर ने कहा…

बहुत ख़ूब !

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

इस अच्छी सी कृति हेतु बधाई स्वीकार करें। ।।।।
आगामी नववर्ष की अग्रिम शुभकामनायें। ।।

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