शनिवार, 17 अक्तूबर 2020

बिखरी खुशबू

 











बिखर के फ़ना हो जाऊं ये मेरी किस्मत ही सही
फिज़ा में खुशबू बन बिखरुं ये भी कम तो नहीं !!


सु-मन 

4 comments:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर

Onkar ने कहा…

बहुत सुन्दर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर।
शारदेय नवरात्रों की हार्दिक शुभकानाएँ।

शिवम् कुमार पाण्डेय ने कहा…

बहुत बढ़िया।

टिप्पणी पोस्ट करें