सोमवार, 28 दिसंबर 2020

सर्द हवाएँ

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बहुत सर्द हैं हवाएँ

घना कोहरा बेहिज़ाब है

जर्द पत्तों में है ख़ामोशी

तेरी ख़लिश बेहिसाब है !!


सु-मन 

शनिवार, 17 अक्तूबर 2020

बिखरी खुशबू

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बिखर के फ़ना हो जाऊं ये मेरी किस्मत ही सही
फिज़ा में खुशबू बन बिखरुं ये भी कम तो नहीं !!


सु-मन 

सोमवार, 12 अक्तूबर 2020

तुम और मैं -१०

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...तुम !
मेरे नाम, कर दो
अपना अधूरा ज्ञान


....मैं !
नि:श्वास, तुझ भीतर 
बनूँ तेरा अभिज्ञान ।



सु-मन

मंगलवार, 8 सितंबर 2020

चाहत

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बहुत जी लिया - २ तुझको जीते जीते
तुझमें खो कर खुद को, अब पाने की चाहत है !!

सु-मन 

शुक्रवार, 21 अगस्त 2020

मदमस्त फुहार

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सुबह ऑफिस जाते हुए रास्ते का नज़ारा 













ये श्वेत सा जब बिखर गया
हरित सी इन फ़िज़ाओं में
झूम उठा माटी का कण कण
भादो की मदमस्त फुहारों में !!

सु-मन 

शुक्रवार, 7 अगस्त 2020

मन की रुबाई

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मन की रूबाइयों पर मत जा ऐ साकी 
जाम भर और रूह को रिंदाना कर दे !!

सु-मन 

बुधवार, 3 जुलाई 2019

कश्मीर

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नज़्म भी जिसके आगोश में फ़ना हो गई 
कश्मीर ! जिसे दुनिया जन्नत पुकारती है ||


सु-मन