वजूद की तलाश में .. अतीत की कलियां जब मुखर उठती हैं .. खिलता है ‘सुमन’ वर्तमान के आगोश में कुछ पल .. दम तोड़ देती हैं पंखुड़ियां .. भविष्य के गर्भ में .. !!
गुरुवार, 6 दिसंबर 2012
सरहद
मेरी सोच मेरे
अहसास की
सरहद नहीं कोई
लफ़्ज़ों को उड़ान
भरने दो
उस छोर तक
शायद कोई हद मिल
जाये इनको
और वापिस लौट
आएँ
तो.....
बता सकूँ
तुम्हें-कि
देखो हद ढूंढ ली
है मैंने भी
तुम्हारी तरह
पर....
जब तक वो लौट के
ना आएँ
जीने दो मुझको
इस सरहद से
अनभिज्ञ
और उड़ने दो
असीमित खयालों
के आसमां में
तुम संग
तुम्हारे बिना ...!!
सु-मन
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शुक्रवार, 16 नवंबर 2012
रविवार, 26 अगस्त 2012
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