रविवार, 19 अप्रैल 2015

बीती शाम

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भरा भरा पर खाली खाली (घर की छत से दिखता आसमां)

















बीती शाम
हवा ने एक चुटकी काटी
और नम पलकों से
चुरा ले गई कुछ बूँदें
खुश्क आँखें देखती रही
उन्हें जाते , दूर कहीं
बाद इसके –
आसमां के ज़िस्म से
उतरने लगा लिबास कोई
रूह मेरी
देर तक पैरहन एक सिलती रही !!


सु-मन 











मंगलवार, 7 अप्रैल 2015

सजदा

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दो बूँद अश्क पीकर 
पाक हुई रूह 
खाली दामन को 
काँटों से भर 
आबाद हुआ ज़िस्म 

आज फिर-
जिंदगी की मज़ार पर 
अधूरे अरमानों ने सजदा किया !!


सु-मन 

बुधवार, 11 मार्च 2015

आदतन

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आदतन उसने झूठ से फिर बहलाया हमको
आदतन हम फरेब-ए-वफ़ा को सच मान बैठे !!

सु-मन 

शनिवार, 31 जनवरी 2015

जाम-ए-तन्हाई

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बाद – ए- अरसे लौटा है तेरा ख़याल
जाम –ए- तन्हाई की तलब होने को है !!



सु-मन 

बुधवार, 28 जनवरी 2015

गलती ख़्वाहिशें

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जाने किस नम कोने में 
दबी हैं ख़्वाहिशें 
गल रही हैं पर पनपती नहीं !!


सु-मन 

शनिवार, 17 जनवरी 2015

आरजूओं का अलाव

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पुर्ज़ा पुर्ज़ा कर दिए हैं एहसास 
सूखे रिश्ते की पपड़ियों को 
कर दिया है इक्कट्ठा 

देखो ! जलने लगा है 
आरजूओं का अलाव धुआँ धुआँ !!


सु-मन 

सोमवार, 5 जनवरी 2015

ईलाज-ए-मर्ज़

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ईलाज - ए - मर्ज़ भी होता है वक़्त रहते
ज़हर बन जाती है दवा एक मुद्दत के बाद !!

सु-मन 
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